अमृतसर । पंजाब में आज, 5 दिसंबर 2025 को किसान संगठनों ने राज्यव्यापी रेल रोको आंदोलन शुरू किया है। किसान संगठन किसान मजदूर मोर्चा ने दोपहर 1 से 3 बजे तक यह प्रदर्शन आयोजित करने का आह्वान किया है, जिसमें फसलों के उचित मूल्य की मांग, बिजली संशोधन विधेयक 2025 के खिलाफ विरोध और अन्य किसान मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। इस आंदोलन के कारण पंजाब के 19 स्थानों पर रेल यातायात प्रभावित हो रहा है। कई प्रमुख ट्रेनों के मार्ग में बदलाव किया गया है जबकि कुछ ट्रेनों को रद्द भी किया गया है।
आंदोलन के पीछे के कारण और आरोप
किसान नेताओं का कहना है कि यह प्रदर्शन केंद्र सरकार के प्रस्तावित बिजली संशोधन विधेयक 2025 को रद्द करने स्मार्ट प्रीपेड मीटर हटाने और पुरानी मीटर प्रणाली को बहाल करने की मांग पर आधारित है। उनका आरोप है कि यह विधेयक बिजली के निजीकरण का रास्ता खोलने और सार्वजनिक संपत्तियों को बेचे जाने का प्रयास कर रहा है जिससे किसानों मजदूरों और आम उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा।
किसान संगठन ने इस आंदोलन को शांतिपूर्ण रूप से करने का संकल्प लिया है, लेकिन इसके बावजूद पंजाब पुलिस ने आंदोलन के पहले ही दिन किसान नेताओं को हिरासत में लेने और नजरबंद करने की कार्रवाई शुरू कर दी है। पंजाब पुलिस ने बुधवार रात से किसान नेताओं के घरों पर छापेमारी शुरू कर दी थी। अमृतसर गुरदासपुर होशियारपुर लुधियाना रोपड़ पटियाला सहित कई जिलों में किसान नेताओं के आवासों पर पुलिस ने दबिश दी और कुछ नेताओं को नजरबंद कर दिया।
प्रदर्शन में प्रभावित होने वाली ट्रेन सेवाएं
रेल रोको आंदोलन के कारण कई ट्रेनों के मार्ग में बदलाव किया गया है और कुछ ट्रेनों को रद्द भी किया गया है। प्रमुख रूप से अमृतसर से दिल्ली के बीच चलने वाली शान-ए-पंजाब दिल्ली-अमृतसर शताब्दी, टाटा एक्सप्रेस, फ्लाइंग मेल और कुछ लोकल डीएमयू ट्रेनों की सेवाएं प्रभावित होंगी। इन ट्रेनों के यात्रीगण को भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है, क्योंकि कई ट्रेनों के मार्ग परिवर्तित किए गए हैं।
रेल रोको आंदोलन के दौरान पंजाब के विभिन्न जिलों में प्रदर्शन किए जाएंगे। प्रमुख प्रदर्शन स्थल में अमृतसर के देविदासपुरा और मजीठा, गुरदासपुर के बटाला और डेरा बाबा नानक पठानकोट का परमानंद फाटक तरनतारन, फिरोजपुर कपूरथला, जालंधर होशियारपुर पटियाला संगरूर फाजिल्का मोगा बठिंडा मुक्तसर, मालेरकोटला, मानसा, लुधियाना, फरीदकोट, और रोपड़ जैसे प्रमुख रेलवे स्टेशन शामिल हैं। इन स्थानों पर किसान अपने अधिकारों की लड़ाई के लिए विरोध प्रदर्शन करेंगे, जिससे रेलवे यातायात में व्यवधान उत्पन्न हो सकता है।
पुलिस कार्रवाई और छापेमारी का आरोप
किसान नेता सरवन सिंह पंढेर ने आरोप लगाया है कि पंजाब सरकार और पुलिस ने आंदोलन को दबाने के लिए दमनकारी कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा विरोध प्रदर्शन से पहले ही किसान नेताओं के घरों पर छापेमारी की जा रही है। पंजाब सरकार के अनुसार इस प्रदर्शन को शांतिपूर्वक आयोजित करने का आह्वान किया गया है, लेकिन किसान संगठनों का कहना है कि पुलिस कार्रवाई और छापेमारी के कारण प्रदर्शनकारियों के मनोबल को प्रभावित किया जा रहा है।
किसान संगठनों की प्रमुख मांगें
किसान संगठनों की सबसे बड़ी मांग बिजली संशोधन विधेयक 2025 को पूरी तरह से वापस लेना है। इसके अलावा प्रीपेड स्मार्ट मीटर को हटाने और पुरानी मीटर प्रणाली को बहाल करने की भी मांग की जा रही है। किसानों का आरोप है कि यह विधेयक और अन्य नीतियां किसानों और आम नागरिकों को भारी आर्थिक बोझ में डालेंगी और इससे बिजली बोर्ड के निजीकरण की दिशा में एक कदम बढ़ाया जाएगा।
पंजाब में हो रहे इस रेल रोको आंदोलन का उद्देश्य किसानों की आवाज़ उठाना है जिन्हें उनके उत्पादों के उचित मूल्य की जरूरत है। इसके साथ ही केंद्र सरकार के प्रस्तावित बिजली संशोधन विधेयक 2025 के खिलाफ भी यह प्रदर्शन हो रहा है। सरकार से मांग की जा रही है कि वह इस विधेयक को वापस ले और किसानों के मुद्दों पर गंभीरता से विचार करें। इस आंदोलन के कारण राज्यभर में रेल यातायात प्रभावित हो सकता है और जनता को इस दौरान सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है।
