थरूर की यह बैठक उस समय खास महत्व रखती है, जब केरल विधानसभा चुनावों से पहले कांग्रेस में अंदरूनी तनाव की खबरें लगातार आ रही थीं। थरूर के कई हफ्तों से पार्टी बैठकों से दूर रहने और कुछ सार्वजनिक बयानों के कारण असहज माहौल बन गया था। सूत्रों के अनुसार थरूर ने यह बैठक खुद मांग की थी, क्योंकि उन्हें लगता था कि उनके कद और योगदान को पर्याप्त महत्व नहीं दिया जा रहा है। चार बार सांसद और कांग्रेस कार्यसमिति के सदस्य होने के बावजूद उन्हें पार्टी में मान्यता और राजनीतिक स्वतंत्रता की कमी का अनुभव हो रहा था।
बैठक में खुलकर चर्चा हुई और थरूर ने उन अटकलों को भी खारिज किया जिनमें कहा जा रहा था कि वे केरल में मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार बनना चाहते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका फोकस तिरुवनंतपुरम से सांसद के रूप में अपने क्षेत्र के लोगों के हितों की रक्षा पर है। बैठक में पार्टी के भीतर उनकी भूमिका, केरल इकाई के साथ तालमेल और विधानसभा चुनावों से पहले एकजुटता की जरूरत जैसे मुद्दों पर विस्तार से बात हुई। माना जा रहा है कि राहुल गांधी ने थरूर को पार्टी के लिए उनकी अहमियत का भरोसा दिलाया और केरल में सभी वरिष्ठ नेताओं के साथ मिलकर काम करने पर जोर दिया।
बैठक के पीछे की वजहों में एक बड़ा कारण यह भी था कि थरूर को हाल के दिनों में पार्टी की रणनीतिक बैठकों से बाहर रखा गया था, जिनमें केरल चुनावों को लेकर अहम चर्चा हुई थी। थरूर को खासतौर पर 19 जनवरी को कोच्चि में हुई ‘महा पंचायत’ रैली में मंच पर नाम न लिए जाने से ठेस पहुंची थी, जिसे उन्होंने व्यक्तिगत रूप से अपमान की तरह देखा। इसके अलावा कुछ विदेश नीति पर उनके बयान पार्टी की लाइन से अलग माने गए, जिससे नेतृत्व असहज हुआ।
बैठक के बाद थरूर ने सोशल मीडिया पर इसे सकारात्मक बताया और राहुल गांधी व खरगे का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि सभी नेता देश की जनता की सेवा के लिए एकजुट होकर आगे बढ़ने के लिए प्रतिबद्ध हैं। इस बैठक से यह साफ संदेश गया कि कांग्रेस नेतृत्व और थरूर के बीच दरार को पाटने की कोशिशें जारी हैं और केरल चुनावों से पहले पार्टी में एकता बनाए रखने की रणनीति पर काम हो रहा है।
अब सवाल यह है कि क्या यह बैठक कांग्रेस के लिए फिर से स्थिरता और रणनीतिक एकजुटता की शुरुआत साबित होगी, या फिर अंदरूनी असंतोष कहीं और से उभरकर नई चुनौतियां खड़ी करेगा। फिलहाल इस बैठक ने एक महत्वपूर्ण संदेश दे दिया है कि कांग्रेस नेतृत्व और थरूर के बीच संवाद खुला है और पार्टी के भीतर सियासी संतुलन बनाए रखने की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं।
