नई लखपति बिटिया योजना के तहत सरकार बेटी के जन्म से लेकर ग्रेजुएशन या डिप्लोमा तक अलग-अलग शैक्षणिक पड़ावों पर कुल 56,000 रुपये जमा करेगी, जो समय के साथ मिलकर ब्याज सहित 1 लाख रुपये से अधिक हो सकते हैं। यह राशि सीधे बेटी के आधार-लिंक्ड बैंक खाते में ट्रांसफर की जाएगी। राशि निकासी की शर्तों के अनुसार, यह 18 वर्ष की आयु पूरी होने और 12वीं पास करने पर या 21 वर्ष की आयु में ग्रेजुएशन/डिप्लोमा पूरा करने के बाद की जा सकेगी।
इस योजना में राशि चरणबद्ध रूप से दी जाएगी। जन्म के समय 11,000 रुपये, कक्षा 1, 6 और 9 में प्रवेश पर 5,000-5,000 रुपये, कक्षा 10 पास करने पर 5,000 रुपये, कक्षा 12 में प्रवेश पर 5,000 रुपये और ग्रेजुएशन या डिप्लोमा के दौरान 20,000 रुपये दिए जाएंगे। कुल मिलाकर 56,000 रुपये की सरकारी सहायता बेटियों के खाते में जमा होगी, जो मैच्योरिटी पर बढ़कर करीब एक लाख रुपये बन सकती है।
योजना का लाभ केवल उन्हीं बेटियों को मिलेगा जिनका जन्म दिल्ली में हुआ है और जिनका परिवार कम से कम तीन साल से राजधानी में रह रहा है। परिवार की वार्षिक आय 1.20 लाख रुपये से कम होनी चाहिए और हर परिवार की अधिकतम दो बेटियां ही योजना के लिए पात्र होंगी। लाभार्थी को मान्यता प्राप्त संस्थान से पढ़ाई करनी होगी और पूरा टीकाकरण अनिवार्य है। 18 साल से पहले शादी हो जाने पर लाभ निरस्त कर दिया जाएगा; यदि निर्धारित शर्तों पर क्लेम समय पर नहीं किया गया तो राशि सरकार को वापस चली जाएगी।
सबसे अहम सवाल यह है कि क्या नई योजना में दोबारा आवेदन करना होगा? सरकार ने स्पष्ट कहा है कि लाडली योजना 31 मार्च 2026 को बंद होगी और नई लखपति बिटिया योजना 1 अप्रैल 2026 से शुरू होगी, इसलिए पात्र लाभार्थियों को इसके लिए अलग से आवेदन करना होगा। आवेदन की पूरी प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन होगी, जिससे किसी सरकारी दफ्तर जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। नई पात्र बेटियों को तय शर्तों के अनुसार आवेदन करना होगा।
सरकार ने यह भी बताया है कि लाडली योजना के कई खाते मैच्योरिटी के बाद भी क्लेम नहीं किए गए थे। ऐसे लंबित मामलों में भुगतान की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और बड़ी राशि लाभार्थियों को जारी की जा चुकी है। योजना के लिए शुरुआती तौर पर लगभग 160 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है और लाडली योजना की अप्रयुक्त राशि को भी नई लखपति बिटिया योजना में समायोजित किया जाएगा ताकि बेटियों के भविष्य के लिए आर्थिक सहयोग निरंतर जारी रह सके।
