नई दिल्ली। गुवाहाटी 30 नवंबर: असम सरकार ने विधानसभा में शुक्रवार को पुलिस कार्रवाई से जुड़े मौतों और घायल होने के मामलों का विस्तृत आंकड़ा पेश किया। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा, जो गृह विभाग के भी प्रभारी हैं, ने विधायक अखिल गोगोई के लिखित प्रश्न के जवाब में बताया कि 10 मई 2021 से अब तक कुल 80 लोग पुलिस कार्रवाई के दौरान मारे गए, जिनमें से 39 मौतें पुलिस हिरासत में हुईं और 41 आरोपियों की मौत हिरासत में लेने से पहले हुई।
सरकार ने यह भी बताया कि 223 मामले ऐसे हैं जिनमें लोग हिरासत में या रिमांड पर भेजे जाने से पहले गोलीबारी या अन्य कारणों से घायल हुए। इनमें से 183 लोग पुलिस हिरासत में घायल हुए जबकि 40 लोग रिमांड पर जाने से पहले गोलीबारी का शिकार हुए। ये आंकड़े असम में कानून-व्यवस्था की स्थिति और पुलिस की कार्रवाई की पारदर्शिता को लेकर चर्चा का विषय बने हुए हैं।
जांच और प्रक्रिया
मुख्यमंत्री सरमा ने स्पष्ट किया कि हर घटना में एफआईआर दर्ज की गई और हिरासत में हुई मौतों की सभी मामलों की जांच कार्यकारी मजिस्ट्रेटों द्वारा की गई, जैसा कि CrPC, BNSS और NHRC के दिशा-निर्देशों में अनिवार्य है। उन्होंने बताया कि कुल 180 मामलों में मजिस्ट्रेट स्तर की जांच हुई जिसमें 78 हिरासत मृत्यु मामलों की जांच शामिल है। हालांकि गोलीबारी या घायल होने के मामलों में मजिस्ट्रेट जांच अनिवार्य नहीं है फिर भी सरकार ने कहा कि 102 ऐसे मामलों में भी मजिस्ट्रेट जांच की गई। यह दिखाता है कि असम सरकार ने कानून-व्यवस्था की कार्रवाई में पारदर्शिता और जवाबदेही बनाए रखने का प्रयास किया है।
राज्य में सुरक्षा और जवाबदेही
विशेषज्ञ मानते हैं कि पुलिस कार्रवाई में हुई मौतें और घायल होने के मामले राज्य में सुरक्षा बलों की कार्रवाई के पैमानों और कानून-व्यवस्था की स्थिति का संकेत देते हैं। विपक्ष ने सरकार से इन घटनाओं पर कड़ी कार्रवाई और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। वहीं मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि सभी मामलों की नियमित जांच और रिपोर्टिंग की जा रही है और जिन मामलों में किसी स्तर की लापरवाही पाई गई वहां उचित कार्रवाई की जाएगी।
सरकार के आंकड़े और जांच रिपोर्ट इस बात को उजागर करते हैं कि पुलिस हिरासत में हुई मौतों और घायल होने की घटनाओं पर मजबूत निगरानी और जांच की जाती रही है। ये कदम इस बात का संकेत हैं कि राज्य में कानून-व्यवस्था के मानक बनाए रखने और नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा पर ध्यान दिया जा रहा है। असम सरकार ने स्पष्ट किया कि पुलिस कार्रवाई के दौरान हुई मौतें और घायल होने के मामलों की संपूर्ण जांच हो रही है। मुख्यमंत्री के ब्यान से यह भी पता चलता है कि राज्य प्रशासन पारदर्शिता और जवाबदेही को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहा है। कुल मिलाकर यह आंकड़े असम में कानून-व्यवस्था, पुलिस हिरासत और नागरिक सुरक्षा के विषय में गहन बहस का आधार बन सकते हैं।
