गिरफ्तार आरोपी
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान योगेश 41 साल, अरशद 46 साल, और प्रेम शंकर उर्फ अजय 28 साल के रूप में हुई है। पुलिस ने बताया कि योगेश इस गिरोह का सरगना था और बस ड्राइवर के रूप में काम करता था। जबकि अरशद और प्रेम शंकर कंडक्टर और हेल्पर के तौर पर यात्रियों को लूटने के लिए उनका सहयोग करते थे। पुलिस ने इन आरोपियों के पास से 1,850 रुपये नकद और लूट में इस्तेमाल की गई बस भी बरामद की है।
कैसे काम करता था गिरोह
गिरोह के सदस्य यात्रियों को आनंद विहार रेलवे स्टेशन और आईएसबीटी के पास आकर्षक ऑफर देकर अपनी बस में बिठाते थे। वे सिर्फ 30 रुपये में सेंट्रल या नॉर्थ दिल्ली तक पहुँचाने का वादा करते थे। जैसे ही यात्री बस में बैठते उनका सफर और लूट का खेल शुरू हो जाता था।बस जैसे ही दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर पहुंचती, ये बदमाश यात्रियों को धमकाते, मारते और उनकी जेबें साफ कर देते थे। इसके बाद, यात्रियों को सुनसान जगहों पर उतारकर गिरोह के सदस्य फरार हो जाते थे। पुलिस के मुताबिक ये बदमाश जानबूझकर रात या सुबह जल्दी बस चलाते थे ताकि निगरानी कम हो और वे दिन में दो से तीन बार वारदातों को अंजाम दे सकें।
कैसे पकड़ा गया गिरोह
पुलिस को पीड़ितों की कई शिकायतें मिली थीं जिसके बाद डिप्टी कमिश्नर निधिन वल्सन की टीम ने लोकल जानकारी और पेट्रोलिंग के जरिए इस गिरोह को ट्रैक किया। जब ये बस राजघाट के पास रेड लाइट पर रुकी पुलिस ने मौके पर छापा मारा और तीनों आरोपियों को रंगे हाथ पकड़ लिया। उस समय बदमाश यात्रियों को लूट रहे थे। पुलिस ने बस जब्त की और कुछ लूटी हुई रकम भी बरामद की।
गिरोह की कमाई और पुराना रिकॉर्ड
पुलिस ने बताया कि ये बदमाश अपनी बस किराए पर लेकर चलाते थे और रोजाना 1,500 रुपये किराया देते थे। इसके अतिरिक्त लूटपाट से उन्हें रोज़ 1,000 से 2,000 रुपये की कमाई होती थी। दो महीने में इस गिरोह की कमाई एक लाख रुपये से ज्यादा हो चुकी थी। पुलिस ने यह भी बताया कि योगेश जो इस गिरोह का सरगना था, का पहले से ही क्रिमिनल रिकॉर्ड था और उसके खिलाफ लूट, मारपीट और हथियारों से संबंधित मामले दर्ज थे।
