आत्मनिर्भर रक्षा शक्ति की ओर भारत की तेज रफ्तार और पाकिस्तान के लिए नई चुनौती
नई दिल्ली :भारत ने बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य को देखते हुए अपनी रक्षा रणनीति में बड़ा बदलाव किया है और अब देश नॉन कॉन्टैक्ट वॉरफेयर के युग के लिए खुद को तैयार कर रहा है इसका उद्देश्य सीधे टकराव के बजाय तकनीक और उन्नत सिस्टम के जरिए दुश्मन के हमलों को पहले ही निष्क्रिय करना है इसी रणनीति के तहत सरकार ने लगभग ₹2.19 लाख करोड़ की लागत वाली कई प्रमुख रक्षा परियोजनाओं को आगे बढ़ाया है जो आने वाले समय में देश की सैन्य क्षमता को एक नए स्तर पर ले जाएंगी
इस पूरी रणनीति के केंद्र में ‘अनंत शस्त्र’ QRSAM सिस्टम है जो क्विक रिएक्शन के जरिए कम ऊंचाई पर उड़ने वाले ड्रोन और मिसाइल जैसे खतरों को तेजी से नष्ट करने में सक्षम होगा आधुनिक युद्ध में जहां ड्रोन और सटीक हमले तेजी से बढ़ रहे हैं वहां यह सिस्टम भारतीय वायु रक्षा को बेहद मजबूत बनाएगा विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक दुश्मन के लिए एक बड़ी चुनौती साबित होगी क्योंकि यह सिस्टम तेजी से प्रतिक्रिया देकर हमलों को शुरुआती चरण में ही खत्म करने की क्षमता रखता है
इसके साथ ही भारत लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली LRSAM प्रणाली पर भी काम कर रहा है जिसे रूस की S-400 प्रणाली के समकक्ष माना जा रहा है यह सिस्टम दुश्मन के विमानों और बैलिस्टिक मिसाइलों को लंबी दूरी से ही निष्क्रिय कर सकता है जिससे भारत की एयर डिफेंस क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी इस दिशा में हो रहे निवेश का उद्देश्य विदेशी प्रणालियों पर निर्भरता को कम करना और स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा देना है
हवाई ताकत के क्षेत्र में भी भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट AMCA अब डिजाइन चरण से आगे बढ़कर विकास के चरण में पहुंच चुका है यह पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ फाइटर जेट होगा जिसमें दुश्मन के रडार से बचने की क्षमता होगी साथ ही स्वदेशी इंजन पर भी काम चल रहा है जिससे भारत को तकनीकी आत्मनिर्भरता हासिल होगी आने वाले समय में छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमानों पर भी काम किया जाएगा जिन्हें भविष्य के युद्धों के लिए ‘फ्लाइंग कमांड सेंटर’ माना जा रहा है
सिर्फ वायु शक्ति ही नहीं बल्कि समुद्री और साइबर सुरक्षा पर भी भारत का ध्यान केंद्रित है नौसेना के लिए एंटी ड्रोन और टॉरपीडो डिफेंस सिस्टम विकसित किए जा रहे हैं वहीं इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम दुश्मन के संचार और रडार सिस्टम को जाम करने में सक्षम होंगे इससे भारतीय युद्धपोतों की सुरक्षा और मजबूत होगी
इसके अलावा रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन DRDO आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और साइबर सुरक्षा पर भी बड़ा निवेश कर रहा है ताकि साइबर हमलों को रोका जा सके और स्वायत्त हथियारों का बेहतर उपयोग हो सके मिसाइल सिस्टम में भी ‘अस्त्र’ ‘नाग’ और ‘ध्रुवास्त्र’ के नए संस्करणों पर काम चल रहा है जिससे उनकी मारक क्षमता और सटीकता और अधिक बढ़ेगी
इस पूरी रणनीति के पीछे ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और हाल के आतंकी हमलों जैसे घटनाक्रमों का भी बड़ा प्रभाव माना जा रहा है इन घटनाओं ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आधुनिक युद्ध में तकनीकी श्रेष्ठता और त्वरित प्रतिक्रिया कितनी महत्वपूर्ण है इसी को ध्यान में रखते हुए भारत अपने रक्षा बजट में लगातार वृद्धि कर रहा है और स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा दे रहा है
आने वाले समय में यह स्पष्ट होता जा रहा है कि भारत न केवल अपनी सुरक्षा को और मजबूत करेगा बल्कि वैश्विक स्तर पर एक शक्तिशाली सैन्य ताकत के रूप में अपनी स्थिति को और सुदृढ़ करेगा
