नई दिल्ली। कांग्रेस के भीतर एक बार फिर सियासी घमासान तेज हो गया है। वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह के संगठन सुधार से जुड़े बयान ने पार्टी में अंदरूनी कलह को हवा दे दी है। RSS-BJP की कार्यशैली का उदाहरण देकर दिए गए उनके बयान पर कांग्रेस के कई नेताओं ने आपत्ति जताई, जिसके बाद यह मुद्दा खुलकर सियासी बहस में बदल गया।
अब इस विवाद में तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी की एंट्री ने मामला और गरमा दिया है।
रेवंत रेड्डी ने बिना नाम लिए दिग्विजय सिंह के बयान पर पलटवार करते हुए कांग्रेस की विरासत और सोनिया गांधी के नेतृत्व का मजबूती से बचाव किया। उन्होंने कहा कि सोनिया गांधी के फैसलों ने यह साबित किया है कि कांग्रेस ने हमेशा योग्यता और अनुभव को महत्व दिया।
रेवंत रेड्डी ने याद दिलाया कि 1991 में तेलंगाना के एक छोटे से गांव से आने वाले पीवी नरसिम्हा राव को प्रधानमंत्री बनाना और 2004 व 2009 में प्रख्यात अर्थशास्त्री डॉ. मनमोहन सिंह को देश की कमान सौंपना सोनिया गांधी का ऐतिहासिक और दूरदर्शी निर्णय था।
तेलंगाना सीएम ने यह भी कहा कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने आजादी की लड़ाई का नेतृत्व किया, संविधान निर्माण में अहम भूमिका निभाई और लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत किया।
विविधताओं से भरे आधुनिक भारत के निर्माण में कांग्रेस का योगदान हर पन्ने पर दर्ज है। राजनीतिक हलकों में रेवंत रेड्डी के इस बयान को दिग्विजय सिंह की उस सोशल मीडिया पोस्ट का सीधा जवाब माना जा रहा है, जिसमें उन्होंने RSS और जनसंघ में जमीनी कार्यकर्ताओं को शीर्ष पदों तक पहुंचने का उदाहरण दिया था।
गौरतलब है कि दिग्विजय सिंह ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और लालकृष्ण आडवाणी की तस्वीर साझा करते हुए लिखा था कि RSS-BJP में सामान्य कार्यकर्ता भी मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री बन सकता है। उन्होंने इस पोस्ट में राहुल गांधी को टैग कर संगठनात्मक सुधार की जरूरत पर इशारा किया था। इसी बयान के बाद कांग्रेस के भीतर नेतृत्व, संगठन और भविष्य की दिशा को लेकर बहस और तेज हो गई है।