नई दिल्ली। कुशल कर्मियों के विदेशों में प्रवासन को लेकर जारी बहस के बीच विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने विकसित देशों को स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि वे भारतीय प्रतिभा और कौशल को अपने यहाँ आने से रोकते हैं या उसमें बाधाएँ उत्पन्न करते हैं, तो इसका नुकसान उन्हीं देशों को उठाना पड़ेगा। जयशंकर ने जोर देते हुए कहा कि प्रतिभा और कौशल का मुक्त प्रवाह आज की वैश्वीकृत दुनिया में किसी भी देश की प्रगति का अनिवार्य हिस्सा है और यदि विकसित देश इसे सीमित करेंगे, तो वे अपनी ही आर्थिक और तकनीकी प्रगति को बाधित करेंगे।
इंडिया वर्ल्ड वार्षिक सम्मेलन 2025 में आयोजित एक संवाद कार्यक्रम में कई देशों में प्रवासन को लेकर बढ़ती राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाओं से जुड़े प्रश्न पर जयशंकर ने यह टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि आज विश्व के कई हिस्सों में प्रवासन के विरुद्ध वातावरण बनाया जा रहा है, परंतु यह समझना आवश्यक है कि कुशल कर्मियों की आवाजाही पर रोक लगाना संबंधित देशों के हित में नहीं है।
प्रतिभा के प्रवाह में रुकावट से नुकसान होगा — जयशंकर
संवाद सत्र के दौरान उन्होंने कहा कि यदि विकसित राष्ट्र कुशल श्रमिकों के प्रवेश में अत्यधिक अवरोध पैदा करते हैं, तो उन्हें समग्र रूप से हानि होगी। उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया कि जब विश्व उन्नत विनिर्माण के दौर में प्रवेश कर रहा है, तब तकनीकी दक्षता और उच्च कौशल वाले कर्मियों की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। ऐसे में प्रतिभा पर रोक लगाने की नीति दूरगामी नुकसान का कारण बनेगी।
जयशंकर ने स्पष्ट किया कि भारत को दुनिया को यह समझाने की आवश्यकता है कि सीमाओं के पार प्रतिभा का उपयोग सभी देशों के लिए लाभकारी है। कई देशों में प्रवासन पर हो रहे विरोध को लेकर उन्होंने कहा कि आर्थिक दृष्टि से देखने पर यह विरोध लंबे समय तक टिक नहीं सकता, क्योंकि उद्योग और प्रौद्योगिकी के अग्रणी लोग हमेशा बेहतर अवसरों और नवाचार को बढ़ावा देने वाली नीतियों का समर्थन करते हैं।
कुछ देशों में विरोध के कारण और वैश्विक बदलाव
विदेश मंत्री ने यह भी बताया कि कुछ देशों में कुशल कर्मियों की आवाजाही के प्रति जो प्रतिरोध देखा जा रहा है, उसका संबंध उन कंपनियों से भी है, जो अपने उत्पादन केंद्र चीन से बाहर अन्य देशों में स्थानांतरित करना चाहती हैं। ऐसे समय में कुशल श्रमिकों की आवश्यकता और अधिक बढ़ जाती है। यदि इस दौर में प्रवासन को सीमित किया गया, तो उद्योगों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कई विकसित देशों में रोजगार की समस्याओं का मूल कारण विदेशों से आए लोग नहीं हैं, बल्कि यह कि उन देशों ने अपने विनिर्माण कार्यों को बड़े पैमाने पर अन्य देशों में स्थानांतरित होने दिया। इससे उनके भीतर रोजगार अवसर घटे और तनाव बढ़ा।
यात्रा सीमित होगी तो काम बाहर चला जाएगा
जयशंकर ने यह भी कहा कि यदि लोगों की यात्रा में बाधाएँ खड़ी होंगी, तब भी कार्य रुकेगा नहीं। ऐसे में कार्य उन स्थानों पर चला जाएगा, जहाँ श्रमिकों को आसानी से उपलब्ध कराया जा सके। उन्होंने कानूनी स्वरूप में प्रतिभा की गतिशीलता के महत्व को समझाते हुए बताया कि वैश्वीकृत दुनिया में आर्थिक संबंधों को अक्सर व्यापार तक सीमित कर देखा जाता है, जबकि कार्य और कौशल की आवाजाही उतनी ही महत्वपूर्ण होती है।
उन्होंने एक महत्वपूर्ण तथ्य साझा किया कि पिछले वर्ष भारत में एक सौ पैंतीस अरब डॉलर से अधिक धन प्रेषण आया, जो भारत से अमेरिका को किए गए निर्यात के लगभग दोगुना है। इससे स्पष्ट होता है कि विदेशों में कार्यरत भारतीय जनशक्ति भारत की अर्थव्यवस्था में कितना बड़ा योगदान देती है।
अंत में जयशंकर ने कानूनी रूप से संचालित प्रवासन के महत्व पर बल देते हुए अवैध आवाजाही को लेकर चेतावनी भी दी। उन्होंने कहा कि अवैध तरीकों से बाहर जाने के गंभीर परिणाम होते हैं, इसलिए यह आवश्यक है कि देशों के बीच कौशल आधारित कानूनी गतिशीलता को बढ़ावा दिया जाए, जिससे सभी पक्ष लाभान्वित हों।
