नई दिल्ली। इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज यशवंत वर्मा से जुड़े कैश कांड में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी, जिसमें उन्होंने लोकसभा द्वारा गठित जांच कमेटी की वैधता पर सवाल उठाया था।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि लोकसभा की कार्रवाई कानूनी है और जजेस इंक्वायरी एक्ट, 1968 के तहत पूरी तरह वैध है। कोर्ट ने कहा कि जस्टिस वर्मा को हटाने के लिए दोनों सदनों की सहमति जरूरी है, लेकिन जांच कमेटी का गठन सिर्फ लोकसभा की ओर से करना कानून के तहत सही है।
जांच कमेटी के अध्यक्ष सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अरविंद कुमार हैं, जबकि सदस्य मद्रास हाई कोर्ट के जस्टिस मनिंद्र मोहन श्रीवास्तव और वरिष्ठ वकील बी.वी. आचार्य हैं।
जस्टिस वर्मा को 24 जनवरी, 2026 को व्यक्तिगत रूप से कमेटी के सामने पेश होना होगा। इस तारीख के बाद पूरी जांच कमेटी के अधीन आगे बढ़ेगी।
14 मार्च, 2025 को जस्टिस वर्मा के दिल्ली निवास में आग लगी थी। आग बुझाने के दौरान बड़ी मात्रा में जला हुआ कैश मिला था, जिसके बाद उन्हें इलाहाबाद हाई कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया गया और न्यायिक कार्य से अस्थायी रूप से अलग किया गया।
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला साफ करता है कि लोकसभा की जांच कमेटी वैध है और जस्टिस वर्मा की याचिका का कोई असर नहीं होगा।
14 मार्च, 2025 को जस्टिस वर्मा के दिल्ली निवास में आग लगी थी। आग बुझाने के दौरान बड़ी मात्रा में जला हुआ कैश मिला था, जिसके बाद उन्हें इलाहाबाद हाई कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया गया और न्यायिक कार्य से अस्थायी रूप से अलग किया गया।
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला साफ करता है कि लोकसभा की जांच कमेटी वैध है और जस्टिस वर्मा की याचिका का कोई असर नहीं होगा।
