लोहड़ी की रात और अग्नि पूजा का महत्व
लोहड़ी की रात को पवित्र अग्नि प्रज्वलित कर उसकी परिक्रमा करने की परंपरा है। मान्यता है कि अग्नि में अर्पित की गई सामग्री के माध्यम से अग्निदेव और सूर्यदेव प्रसन्न होते हैं। श्रद्धालु अग्नि के चारों ओर घूमते हुए सुख-शांति, स्वास्थ्य और खुशहाली की प्रार्थना करते हैं। यह पर्व सामाजिक एकता और पारिवारिक मेल-मिलाप का भी प्रतीक है।
लोहड़ी की पवित्र अग्नि में क्या अर्पित करना होता है शुभ
लोहड़ी के अवसर पर अग्नि में कुछ विशेष चीजें अर्पित करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। माना जाता है कि इन वस्तुओं का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व होता है।
तिल: नकारात्मकता से मुक्ति का प्रतीक
लोहड़ी की अग्नि में तिल अर्पित करना बेहद शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार तिल पापों का नाश करता है और जीवन से नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है। साथ ही तिल वातावरण को भी शुद्ध करता है, जिससे घर और परिवार पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
गुड़: रिश्तों में मिठास और सौहार्द
गुड़ को मिठास और प्रेम का प्रतीक माना जाता है। लोहड़ी की अग्नि में गुड़ डालने से पारिवारिक और सामाजिक रिश्तों में मधुरता आती है। मान्यता है कि इससे आपसी मतभेद दूर होते हैं और घर में सुख-शांति बनी रहती है।
मूंगफली: अच्छी फसल और समृद्धि की कामना
मूंगफली को अन्न का प्रतीक माना जाता है। विशेष रूप से किसानों के लिए लोहड़ी के दिन अग्नि में मूंगफली अर्पित करना बेहद शुभ माना गया है। ऐसा करने से आने वाले वर्ष में अच्छी फसल और आर्थिक समृद्धि की संभावना बढ़ती है।
रेवड़ी: खुशहाली और सकारात्मक ऊर्जा
लोहड़ी के पर्व पर रेवड़ी का विशेष महत्व है। मान्यता है कि अग्नि में रेवड़ी अर्पित करने से बुरी शक्तियों का नाश होता है, नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है।
आस्था और परंपरा का संगम
लोहड़ी केवल एक पर्व नहीं, बल्कि आस्था, परंपरा और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर है। अग्नि में अर्पित की जाने वाली ये चार चीजें जीवन में खुशहाली, समृद्धि और सकारात्मकता लाने का प्रतीक मानी जाती हैं।
