सतपाल सिंह का जन्म 1 फरवरी 1955 को दिल्ली में हुआ। उन्होंने हनुमान अखाड़ा में कोच गुरु हनुमान के मार्गदर्शन में कुश्ती के दाव पेंच सीखे। 16 साल तक राष्ट्रीय चैंपियन बने रहने वाले सतपाल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता 19 साल की उम्र में 1974 में क्राइस्टचर्च कॉमनवेल्थ गेम्स में सिल्वर मेडल जीतने के साथ मिली। इसके बाद 1978 एलबर्टा और 1982 ब्रिसबेन कॉमनवेल्थ गेम्स में भी रजत पदक जीता। एशियन गेम्स में 1974 तेहरान में कांस्य, 1978 बैंकॉक में रजत और 1982 नई दिल्ली में हैवीवेट स्वर्ण पदक उनके करियर की विशेष उपलब्धियां हैं। 1980 के समर ओलंपिक्स में पुरुष फ्रीस्टाइल 100 किग्रा में उन्होंने देश का प्रतिनिधित्व किया।
सतपाल पारंपरिक कुश्ती में भी माहिर रहे। भारत कुमार, रुस्तम-ए-हिंद, भारत केसरी, महाभारत केसरी, रुस्तम-ए-जमान और हिंद केसरी सहित कई राष्ट्रीय खिताब उन्होंने अपने नाम किए। उन्हें महाबली सतपाल के नाम से भी जाना जाता है।खिलाड़ी जीवन से संन्यास के बाद सतपाल सिंह 1988 से दिल्ली के छत्रसाल स्टेडियम में कोचिंग कर रहे हैं। उनके प्रशिक्षण केंद्र को देश में कुश्ती का हब माना जाता है। उन्होंने सुशील कुमार, योगेश्वर दत्त, रवि कुमार दहिया और अमित कुमार दहिया जैसे पहलवानों को अंतरराष्ट्रीय मंचों के लिए तैयार किया।भारतीय कुश्ती में योगदान के लिए सतपाल सिंह को कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। 1974 में अर्जुन पुरस्कार, 1983 में पद्मश्री, 2009 में द्रोणाचार्य सम्मान और 2015 में पद्मभूषण उनकी असाधारण उपलब्धियों की पुष्टि करते हैं।
70 साल की उम्र में भी सतपाल सिंह सक्रिय हैं और लगातार नए पहलवानों को प्रशिक्षित कर देश का नाम रोशन करने में जुटे हैं। उनके अनुशासन, मेहनत और कुश्ती के प्रति समर्पण ने उन्हें खिलाड़ी और कोच दोनों रूपों में प्रेरक बना दिया है।
