शिंदे गुट–MNS की नजदीकियां बढ़ीं, भाजपा भी हो सकती है बाहर
सूत्रों के मुताबिक, पिछले 24 घंटों से शिंदे गुट की शिवसेना और MNS के वरिष्ठ नेताओं के बीच लगातार बातचीत चल रही है। इन चर्चाओं का केंद्र मेयर पद और सत्ता में भागीदारी है। अगर दोनों दल साथ आते हैं तो न सिर्फ उद्धव ठाकरे गुट बल्कि भाजपा को भी विपक्ष की भूमिका में जाना पड़ सकता है। हालांकि अभी तक किसी भी दल ने औपचारिक ऐलान नहीं किया है, लेकिन घटनाक्रम साफ तौर पर नए राजनीतिक गठबंधन की ओर इशारा कर रहा है।
एक साथ पहुंचे पार्षद, सियासी हलकों में बढ़ी हलचल
राजनीतिक चर्चाओं को उस वक्त और हवा मिल गई जब MNS के 5 और शिंदे गुट के 53 पार्षद एक ही समय पर कोंकण मंडलायुक्त कार्यालय पहुंचे। यहां सभी पार्षद ग्रुप रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया के लिए मौजूद थे। सवाल यह उठने लगा कि क्या यह महज संयोग था या फिर सत्ता की बिसात पर चली गई एक सोची-समझी चाल? दोनों दलों के पार्षदों का एक साथ पहुंचना राजनीतिक संकेतों से भरा माना जा रहा है।
मेयर पद का गणित: कौन कहां खड़ा?
कल्याण-डोंबिवली नगर निगम में मेयर बनने के लिए कम से कम 62 पार्षदों का समर्थन जरूरी है।
शिंदे गुट की शिवसेना: 53 पार्षद
भाजपा: 50 पार्षद
MNS: 5 से बढ़कर संभावित रूप से 7 पार्षद
राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, शिंदे गुट उद्धव ठाकरे गुट के दो पार्षदों को तोड़ने की कोशिश में भी जुटा है। वहीं, उद्धव गुट छोड़कर पहले ही MNS में शामिल हो चुके पार्षदों के सत्ता गठन की स्थिति में राज ठाकरे के साथ बने रहने की संभावना है। ऐसे में MNS की भूमिका किंगमेकर की बनती नजर आ रही है।
बंद कमरे की मुलाकातें, वायरल तस्वीरें और बढ़ा सस्पेंस
कोंकण मंडलायुक्त कार्यालय में सांसद श्रीकांत शिंदे, विधायक नरेश म्हस्के और MNS नेता राजू पाटिल की मौजूदगी ने इस पूरे घटनाक्रम को और गंभीर बना दिया। इन नेताओं की मुलाकातों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं, जिससे सियासी गलियारों में हलचल और तेज हो गई है।
श्रीकांत शिंदे का बयान: संकेत साफ, समर्थन लगभग तय?
इस पूरे घटनाक्रम के बीच सांसद श्रीकांत शिंदे का बयान बेहद अहम माना जा रहा है। उन्होंने कहा,
“जो भी विकास के एजेंडे के साथ आगे आएगा, शिवसेना उसके साथ मिलकर काम करेगी।”
उनके इस बयान को सीधे तौर पर MNS के समर्थन का संकेत माना जा रहा है।
निष्कर्ष: उद्धव ठाकरे के लिए बड़ा झटका, शिंदे की ताकत बढ़ी
अगर शिंदे गुट और MNS का यह गठबंधन औपचारिक रूप लेता है, तो यह उद्धव ठाकरे गुट के लिए बड़ा राजनीतिक झटका होगा। वहीं, एकनाथ शिंदे की शिवसेना नगर निगम स्तर पर अपनी पकड़ और मजबूत कर लेगी। कल्याण-डोंबिवली की राजनीति अब ऐसे मोड़ पर खड़ी है, जहां एक फैसला पूरे महाराष्ट्र की सियासत को नई दिशा दे सकता है।
