नई दिल्ली । सोमवार को दिल्ली स्थित भारतीय जनता पार्टी मुख्यालय में एक अहम बैठक का आयोजन किया गया जिसमें चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के अंतरराष्ट्रीय विभाग की उप-मंत्री सुन हैयान के नेतृत्व में चीनी डेलिगेशन ने भाग लिया। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य दोनों राजनीतिक दलों के बीच द्विपक्षीय संवाद को और अधिक प्रभावी और सक्रिय बनाना था।बीजेपी महासचिव अरुण सिंह के नेतृत्व में बीजेपी प्रतिनिधिमंडल ने CPC के साथ पार्टी-टू-पार्टी संवाद को मजबूती देने के उपायों पर विस्तार से चर्चा की। बीजेपी के विदेश संपर्क विभाग के प्रभारी विजय चौथाईवाले ने इस मुलाकात को महत्वपूर्ण बताया और सोशल मीडिया के माध्यम से इसकी जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि दोनों दलों ने राजनीतिक स्तर पर संचार को प्रभावी बनाने के उपायों पर चर्चा की, जिससे दोनों देशों के बीच सहयोग और संवाद को प्रगति मिल सके।
बैठक में चीन के राजदूत की अहम उपस्थिति
बीजेपी मुख्यालय में हुई इस बैठक में भारत में चीन के राजदूत जू फेइहोंग की उपस्थिति महत्वपूर्ण रही। उनके साथ चीनी डेलिगेशन ने बैठक में हिस्सा लिया। जू फेइहोंग की उपस्थिति ने इस दौरे को चीन की तरफ से विशेष महत्व देने का संकेत दिया। इस दौरान दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने के लिए भविष्य में ऐसे संवादों के निरंतर और नियमित रूप से आयोजन की आवश्यकता पर जोर दिया।
बैठक का उद्देश्य और चीनी कम्युनिस्ट पार्टी का दृष्टिकोण
बैठक का उद्देश्य और चीनी कम्युनिस्ट पार्टी का दृष्टिकोण
चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की उप-मंत्री सुन हैयान ने बैठक के दौरान कहा कि राजनीतिक दलों के बीच संवाद, आपसी समझ और सहयोग महत्वपूर्ण है। CPC और BJP दोनों ने इस बात पर सहमति जताई कि राजनीतिक दलों के बीच मजबूत संवाद द्विपक्षीय संबंधों को नया दिशा दे सकता है और इससे न केवल दोनों देशों के बीच राजनीतिक बल्कि अन्य क्षेत्रों में भी सहयोग को बढ़ावा मिलेगा। यह बैठक उस समय आयोजित की गई है जब भारत और चीन के बीच कई कूटनीतिक चर्चाएं चल रही हैं। इस तरह के दौरों और संवादों के जरिए दोनों देशों के बीच आपसी समझ और विश्वास को बढ़ाया जा सकता है जिससे भविष्य में द्विपक्षीय सहयोग के नए अवसर उत्पन्न हो सकते हैं।
भारत और चीन के संबंधों में नई दिशा
यह मुलाकात भारत और चीन के रिश्तों के लिए अहम मानी जा रही है, खासकर जब दोनों देशों के बीच सीमा विवाद और अन्य कूटनीतिक मुद्दों पर तनाव रहा है। इस संवाद के माध्यम से चीन और भारत दोनों ने दिखाया कि वे द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए तैयार हैं और इस दिशा में सहयोग के नए रास्ते तलाशने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
