तिरुवनंतपुरम से सांसद ने अपने बयान में कहा कि वैवाहिक बलात्कार को अपराध की श्रेणी में डालने की तत्काल आवश्यकता है। इसके लिए उन्होंने भारतीय न्याय संहिता में संशोधन का निजी विधेयक लोकसभा में प्रस्तुत किया। उन्होंने सोशल मीडिया पर यह भी स्पष्ट किया कि प्रत्येक महिला को विवाह संबंध के दायरे में शारीरिक स्वायत्तता और गरिमा का अधिकार होना चाहिए।
निजी विधेयक का अर्थ है कि यह बिल किसी ऐसे सदस्य द्वारा पेश किया जाता है जो मंत्री नहीं है। वहीं, यदि कोई बिल मंत्री पेश करता है, तो उसे सरकारी बिल कहा जाता है। थरूर ने कहा कि यह विधेयक महिलाओं के अधिकारों और सुरक्षा को सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
सांसद ने कहा, ‘‘भारत को अपने संवैधानिक मूल्यों को बनाए रखना चाहिए और ‘ना का मतलब ना’ से सिर्फ हां का मतलब हां होने की ओर बढ़ना चाहिए। हर महिला को विवाह के दायरे में शारीरिक स्वायत्तता और गरिमा का मौलिक अधिकार मिलना चाहिए।’’ उन्होंने यह भी कहा कि वैवाहिक बलात्कार केवल शादी के संबंध में नहीं है, बल्कि यह हिंसा का मामला है और अब इस पर कार्रवाई का समय आ गया है।
थरूर ने कहा कि यह बिल महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा और उनकी गरिमा की रक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने इस बिल के माध्यम से यह संदेश देने का प्रयास किया कि विवाह संबंध में किसी भी प्रकार का जबरदस्ती या बलपूर्वक किया गया संबंध अपराध है और इसे कानूनी संरक्षण की आवश्यकता है।
सांसद ने इससे पहले दो अन्य गैर सरकारी विधेयक भी पेश किए हैं। इनमें से एक बिल व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य स्थिति संहिता, 2020 में संशोधन से संबंधित है। दूसरा बिल राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के पुनर्गठन की सिफारिश केंद्र को करने के लिए राज्य और केंद्र शासित प्रदेश पुनर्गठन आयोग की स्थापना से संबंधित है। थरूर ने बताया कि उनका उद्देश्य विभिन्न विधेयकों के माध्यम से सामाजिक और कानूनी सुधार को सुनिश्चित करना है।
थरूर का यह निजी विधेयक महिलाओं के अधिकारों के संरक्षण और समाज में उनके सुरक्षा की दिशा में कदम है। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि विवाह संबंध में शारीरिक स्वायत्तता का उल्लंघन किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं है। सांसद ने जोर देकर कहा कि कानून में इस बदलाव से महिलाओं की सुरक्षा और न्याय प्रणाली में उनका विश्वास मजबूत होगा।
इस विधेयक के माध्यम से यह संदेश दिया गया है कि समाज में महिलाओं की गरिमा और अधिकारों की रक्षा के लिए कानूनी कदम आवश्यक हैं। थरूर ने यह भी कहा कि ‘ना का मतलब ना’ की अवधारणा को केवल भाषाई नहीं बल्कि कानूनी रूप में भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
सांसद ने बताया कि यह बिल पारित होने की स्थिति में भारतीय न्याय संहिता में संशोधन करेगा और वैवाहिक बलात्कार को स्पष्ट रूप से अपराध की श्रेणी में शामिल करेगा। यह कदम महिलाओं के अधिकारों और सुरक्षा को सुनिश्चित करने की दिशा में ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इस प्रकार, शशि थरूर द्वारा पेश किया गया निजी विधेयक समाज में महिलाओं की सुरक्षा, उनकी गरिमा और मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण प्रयास है। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि अब समय आ गया है कि विवाह संबंध में होने वाले बलात्कार को अपराध की श्रेणी में शामिल कर कानूनी रूप से गंभीरता से लिया जाए।
