नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके (Sri Lankan President Anura Kumara Dissanayake) से मंगलवार को फोन पर बातचीत की। इस चर्चा में पश्चिम एशिया (West Asia.) की बदलती स्थिति पर विस्तार से विचार विमर्श हुआ। खासतौर पर वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ रहे असर को लेकर गहरी चिंता जताई गई। दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने के महत्व पर जोर दिया। बातचीत के दौरान भारत और श्रीलंका के बीच ऊर्जा सहयोग से जुड़ी प्रमुख पहलों की प्रगति की समीक्षा की गई।
दोनों देशों ने ऊर्जा क्षेत्र में साझेदारी को और मजबूत करने के लिए ठोस कदम उठाने का फैसला किया। क्षेत्रीय सुरक्षा बढ़ाने के लिए भी कई अहम मुद्दों पर सहमति बनी। यह सहयोग दोनों देशों के हितों को ध्यान में रखते हुए आगे बढ़ाया जाएगा। भारत और श्रीलंका को निकट और विश्वसनीय साझेदार बताया गया। दोनों नेताओं ने साझा चुनौतियों का सामना करने के लिए मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता दोहराई।
एनर्जी सप्लाई पर हुई चर्चा
वैश्विक स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति में हो रही बाधाओं से निपटने के लिए रणनीतिक सहयोग को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया। यह साझेदारी दोनों देशों की सुरक्षा और विकास के लिए अहम है। इस चर्चा से भारत-श्रीलंका संबंधों में नई ऊर्जा मिली है। दोनों पक्षों ने भविष्य में भी नियमित संपर्क बनाए रखने और व्यावहारिक सहयोग बढ़ाने का संकल्प लिया। क्षेत्रीय शांति और प्रगति के लिए यह साझा प्रयास महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
भारत और श्रीलंका के संबंध बेहद पुराने हैं, जो सांस्कृतिक, धार्मिक और ऐतिहासिक विरासत पर आधारित हैं। श्रीलंकाई गृहयुद्ध और भारतीय शांति सेना (IPKF) के हस्तक्षेप से तनाव बढ़ा, लेकिन मुक्त व्यापार समझौते (FTA) ने आर्थिक सहयोग को मजबूत किया। बीते वर्षों में, श्रीलंकाई आर्थिक संकट में भारत ने लगभग 4 अरब डॉलर की सहायता (क्रेडिट लाइन, करेंसी स्वैप, ईंधन और खाद्य सामग्री) देकर पड़ोस प्रथम नीति का सबूत दिया। कोविड महामारी में ऑक्सीजन और वैक्सीन सहायता भी प्रदान की गई। हाल के वर्षों में उच्चस्तरीय यात्राओं, रक्षा समझौते, ऊर्जा कनेक्टिविटी, डिजिटल भुगतान और व्यापार से संबंध नई ऊंचाई पर पहुंचे हैं।
