प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्ष की शुरुआत सकारात्मक रही है और आत्मविश्वासी भारत विश्व के लिए आशा की किरण बनकर उभरा है। उन्होंने भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते को युवाओं, किसानों, निर्माताओं और सेवा क्षेत्र के लिए अपार अवसर वाला कदम बताया। पीएम ने जोर दिया कि यह समझौता महत्वाकांक्षी भारत, आकांक्षावान युवा और आत्मनिर्भर भारत के लिए है और इसे भारतीय निर्माता अपनी क्षमताओं को बढ़ाने के लिए भुनाएँ। उन्होंने सभी उत्पादकों को आगाह किया कि गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दें और सर्वोत्तम उत्पादों के साथ वैश्विक बाजार में प्रवेश करें। इससे न केवल यूरोपीय संघ के 27 देशों के खरीदारों से लाभ होगा, बल्कि विश्वास और दीर्घकालिक प्रभाव भी स्थापित होगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि कंपनियों के ब्रांड राष्ट्र के ब्रांड के अनुरूप नई प्रतिष्ठा बनाएंगे और यह समझौता मछुआरों, किसानों, युवाओं और सेवा क्षेत्र में कार्यरत लोगों के लिए वैश्विक अवसर खोलेगा।
प्रधानमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय ध्यान स्वाभाविक रूप से बजट की ओर जाता है, लेकिन इस सरकार की पहचान सुधार, क्रियान्वयन और परिवर्तन रही है। उन्होंने कहा कि देश सुधार की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहा है और इसे गति देने में सांसदों का योगदान महत्वपूर्ण है। पीएम ने कहा कि देश अब दीर्घकालिक समस्याओं से हटकर दीर्घकालिक समाधानों की ओर बढ़ रहा है, जिससे पूर्वानुमान योग्यता और वैश्विक विश्वास बढ़ता है। उन्होंने रेखांकित किया कि सभी निर्णय मानव-केंद्रित होंगे और तकनीक का प्रयोग संवेदनशीलता के साथ किया जाएगा।
प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार की ‘लास्ट माइल डिलीवरी’ सुनिश्चित करने की परंपरा जारी रहेगी, योजनाएं सीधे लोगों के जीवन तक पहुँचेंगी और नेक्स्ट जेनरेशन रिफॉर्म के साथ सुधार यात्रा आगे बढ़ेगी। उन्होंने भारत के लोकतंत्र और जनसांख्यिकी को विश्व के लिए आशा की किरण बताया और सांसदों से आग्रह किया कि वे समाधानों को गति दें, निर्णयों को सशक्त बनाएं और अंतिम छोर तक डिलीवरी सुनिश्चित करें। उन्होंने सभी को धन्यवाद और शुभकामनाएं देते हुए संबोधन समाप्त किया।
