नई दिल्ली। वाराणसी में महाराजा सुहेलदेव की जयंती पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान यूपी की राजनीति उस वक्त गरमा गई, जब योगी सरकार के कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर ने मंच से ही सुभासपा प्रमुख और सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर (ओपी राजभर) पर तीखा हमला बोल दिया। अनिल राजभर ने नारेबाजी कर रहे सुभासपा समर्थकों को निशाना बनाते हुए कहा, “जैसे इनके नेता चोर हैं, वैसे ही ये सब हैं, समाज को बेचने का काम करते हैं।”
इस बयान के बाद मौके पर हंगामा मच गया और राजनीतिक विवाद खुलकर सामने आ गया।
दरअसल, वाराणसी के सुहेलदेव पार्क में आयोजित समारोह के दौरान पीला गमछा पहने सुभासपा समर्थक लगातार नारेबाजी कर रहे थे। आयोजकों द्वारा रोकने की कोशिश के बावजूद जब नारेबाजी बंद नहीं हुई, तो अनिल राजभर भड़क गए। उन्होंने अपने समर्थकों को इशारा करते हुए नारेबाजी कर रहे कार्यकर्ताओं को पंडाल से बाहर निकालने का निर्देश दिया। इसके बाद दोनों पक्षों के समर्थकों के बीच तनातनी की स्थिति बन गई और माहौल कुछ देर के लिए तनावपूर्ण हो गया।
अनिल राजभर के इस बयान से आहत सुभासपा समर्थकों ने वहीं धरना शुरू कर दिया। सुभासपा युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष रुद्र राजन राजभर ने साफ कहा कि जब तक अनिल राजभर सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगते या उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं होती, तब तक धरना जारी रहेगा। उनके साथ कई सुभासपा नेता और कार्यकर्ता धरने पर बैठे हैं।
यह विवाद नया नहीं है। अनिल राजभर और ओपी राजभर के बीच पुरानी राजनीतिक तनातनी रही है।
अनिल राजभर शुरू से ही भाजपा-सुभासपा गठबंधन के खिलाफ रहे हैं। इससे पहले ओपी राजभर ने सपा के साथ मिलकर विधानसभा चुनाव लड़ा था और अनिल राजभर को हराने के लिए अपने बेटे को मैदान में उतारा था, हालांकि अनिल राजभर चुनाव जीतकर मंत्री बने। बाद में ओपी राजभर के भाजपा से गठबंधन करने पर भी अनिल राजभर ने खुला विरोध किया था।
बताया जा रहा है कि इस पूरे मामले को लेकर ओपी राजभर ने भाजपा के वरिष्ठ नेताओं से भी शिकायत की है। अब यह देखना अहम होगा कि पार्टी नेतृत्व इस खुले टकराव पर क्या रुख अपनाता है, क्योंकि यह विवाद एनडीए गठबंधन के भीतर बढ़ती खींचतान की ओर इशारा कर रहा है।