नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली इन दिनों प्रदूषण और सर्दी की दोहरी मार झेल रही है। एक तरफ तापमान लगातार गिर रहा है, दूसरी ओर वायु गुणवत्ता में सुधार की तमाम कोशिशों के बावजूद हालात चिंताजनक बने हुए हैं। बुधवार को हल्की राहत के संकेत मिले थे, लेकिन गुरुवार तड़के एक बार फिर हवा में ज़हरीले कणों की मात्रा बढ़ गई और कई इलाकों में एयर क्वालिटी इंडेक्स AQI बेहद खराब से गंभीर स्तर की ओर पहुँच गया। सुबह से छाई घनी धुंध और कोहरे ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है जिससे लोगों के स्वास्थ्य और दैनिक जीवन पर भारी असर पड़ रहा है।
दिल्ली में पिछले एक महीने से प्रदूषण का स्तर लगातार ऊँचा बना हुआ है। बीच-बीच में हल्का सुधार जरूर देखने को मिला लेकिन हवा की समग्र गुणवत्ता में कोई स्थायी सुधार नहीं हुआ। हाल ही में मिले मामूली सुधार के आधार पर वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग CAQM ने बुधवार शाम को GRAP स्टेज-3 के तहत लागू प्रतिबंध हटा दिए थे। इन पाबंदियों के हटने के बावजूद दिल्ली की हवा अभी भी लोगों के लिए असुरक्षित बनी हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि बिना ठोस कदमों के सिर्फ अस्थायी सुधार से दिल्ली की प्रदूषण समस्या का समाधान संभव नहीं।
वजीरपुर और बवाना में प्रदूषण का स्तर गंभीर
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड CPCB के ताज़ा आंकड़ों ने एक बार फिर राजधानी के हालात को चिंताजनक बताया है। गुरुवार सुबह छह बजे दर्ज किए गए डेटा के अनुसार वजीरपुर और बवाना दिल्ली के सबसे अधिक प्रदूषित इलाके रहे। वजीरपुर में AQI 404 और बवाना में 403 रिकॉर्ड किया गया-जो स्पष्ट रूप से गंभीर श्रेणी में आता है। गंभीर श्रेणी की हवा सीधे-सीधे सांस लेने वाले लोगों के स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती है और अस्थमा, फेफड़ों की बीमारी, हृदय रोग और आंखों में जलन जैसी समस्याओं को गंभीर रूप दे सकती है।
स्थानीय निवासियों के अनुसार सुबह के समय क्षेत्र में धुंध इतनी घनी होती है कि 100–200 मीटर से आगे कुछ साफ दिखाई नहीं देता। कई लोग आंखों में जलन, गले में खराश और सांस लेने में परेशानी की शिकायत कर रहे हैं।
अधिकांश इलाकों में हवा ‘बेहद खराब’ श्रेणी में
दिल्ली के अन्य बड़े हिस्से भी प्रदूषण की गिरफ्त में हैं। CPCB के अनुसार विवेक विहार में AQI 395, जहांगीर पुरी में 392, जबकि आनंद विहार और नरेला में 386 दर्ज किया गया। बुराड़ी और चांदनी चौक में AQI क्रमशः 368 और सोनिया विहार में 355 रहा। आर.के. पुरम में भी हवा की गुणवत्ता बेहद खराब श्रेणी में पाई गई, जहां सूचकांक 354 के आसपास रहा। यह सभी रीडिंग स्पष्ट करती हैं कि राजधानी के ज्यादातर हिस्सों में हवा का स्तर स्वास्थ्य के अनुरूप नहीं है और इन इलाकों में रहने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। घनी धुंध और कोहरा बने परेशानियों का कारण
पिछले कुछ दिनों से सुबह और शाम के समय दिल्ली में घनी धुंध छाई रहती है। गुरुवार की सुबह भी राजधानी के आसमान में कोहरे और प्रदूषण की बड़ी परत जमी हुई दिखाई दी। दृश्यता बेहद कम होने से सड़क हादसों की आशंका बढ़ गई है वहीं सामान्य आवाजाही और दफ्तरों या स्कूलों को जाने वाले लोगों को भी भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है।
मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि तापमान में गिरावट और हवा की रफ्तार कम होने के कारण प्रदूषक कण जमीन के पास ही जमा हो जाते हैं, जिससे हवा और अधिक जहरीली बन जाती है। यह स्थिति अगले कुछ दिनों तक बनी रह सकती है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने दी सावधानी बरतने की सलाह
डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों को सावधानी बरतने की अपील की है। उनका कहना है कि ऐसे हालात में अधिक समय तक बाहर रहना खतरनाक हो सकता है, खासकर बुजुर्गों, बच्चों, गर्भवती महिलाओं और अस्थमा या हृदय रोगियों के लिए।
विशेषज्ञों की सलाह
अनावश्यक बाहर निकलने से बचें। बाहर जाने पर N95 या अच्छी गुणवत्ता वाला मास्क पहनें। घर के भीतर एयर प्यूरीफायर का उपयोग करें।सुबह और शाम के समय खुली हवा में व्यायाम करने से बचें।पानी अधिक पिएं और सेहत का ध्यान रखें। दिल्ली की हवा में यह गंभीरता हमें एक बार फिर सोचने पर मजबूर करती है कि प्रदूषण से निपटने के लिए सिर्फ अस्थायी कदम नहीं, बल्कि दीर्घकालिक और सख्त नीतियों की जरूरत है। जब तक प्रदूषण के मूल कारणों को खत्म नहीं किया जाएगा, तब तक राजधानी को हर सर्दी इस घुटन से जूझना पड़ेगा।