प्रेमानंद महाराज का जीवन और उनके विचार आज के दौर में मानसिक शांति और आत्मिक संतुलन की मिसाल बन गए हैं। उनके जीवन के सूत्र सरल हैं जटिल नहीं। वे मानते हैं कि जीवन का वास्तविक आनंद भौतिक सुखों में नहीं बल्कि मन की स्थिरता सही आचरण और ईश्वर के प्रति भावनात्मक जुड़ाव में छिपा है।
महाराज का मूल संदेश सत्य और ईमानदारी पर आधारित है। उनका मानना है कि व्यक्ति तभी संतुष्ट और आत्मविश्वासी बन सकता है जब वह अपने शब्द और कर्म में सच्चा रहे। उनके अनुसार ईमानदारी केवल नैतिक मूल्य नहीं बल्कि आत्मिक शांति और जीवन की स्थिरता का आधार है। जब हम सच के मार्ग पर चलते हैं तो जीवन की उलझनें सरल हो जाती हैं और मन हल्का महसूस करता है।
करुणा और प्रेम को महाराज जीवन का असली आभूषण मानते हैं। दूसरों के प्रति संवेदनशीलता और मदद की भावना केवल समाज के लिए नहीं बल्कि अपने मन को भी प्रसन्नता और समृद्धि देती है। छोटे-छोटे अच्छे कर्म चाहे किसी की मदद करना हो या समय पर किसी का साथ देना जीवन को अर्थपूर्ण और सुखद बनाते हैं।मन पर नियंत्रण यानी क्रोध चिंता और नकारात्मक भावनाओं से दूर रहना महाराज के जीवन मंत्रों का अहम हिस्सा है। उनका कहना है कि धैर्य संयम और आत्म-अनुशासन से ही व्यक्ति मुश्किल परिस्थितियों में भी स्थिर रह सकता है। जब हम अपने विचारों और भावनाओं को नियंत्रित करना सीख जाते हैं तब जीवन सहज और संतुलित हो जाता है।
समय और कर्म के महत्व को भी वे हमेशा रेखांकित करते हैं। समय का सम्मान करना और सही दिशा में लगातार प्रयास करना ही जीवन को सार्थक बनाता है। आलस्य और टालमटोल से बचकर किया गया नियमित और शांत कर्म न केवल परिणाम देता है बल्कि आत्मसंतोष भी प्रदान करता है।भौतिक सुख की तुलना में आंतरिक खुशी को वे अधिक महत्वपूर्ण मानते हैं। जो व्यक्ति वर्तमान में अपनी उपलब्धियों और जीवन में प्राप्त चीजों के लिए कृतज्ञ रहता है वही वास्तव में आनंदित और संतुष्ट होता है। बाहरी उपलब्धियां क्षणिक हो सकती हैं लेकिन आंतरिक संतोष स्थायी और स्थिर रहता है।
नाम-जप को वे जीवन का सबसे सरल और प्रभावी साधन बताते हैं। ईश्वर के नाम का स्मरण मन को स्थिर करता है और कठिन समय में मार्गदर्शन देता है। निस्वार्थ सेवा को महाराज भक्ति का सर्वोत्तम रूप मानते हैं जिसमें बिना किसी अपेक्षा के किए गए कर्म मन को हल्का और जीवन को सार्थक बनाते हैं।प्रेमानंद महाराज के जीवन के मंत्र यह संदेश देते हैं कि सादगी संयम और कोमल भाव के साथ जिया गया जीवन ही वास्तविक शांति संतुलन और आनंद प्रदान करता है। उनके विचार हमें दिखाते हैं कि बाहरी सुखों के पीछे भागने की बजाय सरल जीवन सही कर्म और ईश्वर-भक्ति ही परम आनंद का मार्ग हैं।
