प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में संस्कृत का यह श्लोक उद्धृत किया
इस श्लोक का भावार्थ है कि सभी औषधियों में हंसी को सबसे श्रेष्ठ माना गया हैक्योंकि यह मनुष्य के अपने नियंत्रण में होती हैसहज रूप से उपलब्ध है और स्वास्थ्य के साथ-साथ आनंद को भी बढ़ाती है। प्रधानमंत्री ने इस सुभाषित के जरिए यह संदेश दिया कि स्वस्थ जीवन के लिए केवल दवाइयों पर निर्भर रहना ही पर्याप्त नहीं हैबल्कि मानसिक प्रसन्नता और सकारात्मक दृष्टिकोण भी उतने ही आवश्यक हैं।
प्रधानमंत्री मोदी का यह संदेश ऐसे समय में सामने आया हैजब तेज़ रफ्तार जीवनशैलीतनाव और मानसिक दबाव लोगों के स्वास्थ्य पर गहरा असर डाल रहे हैं। उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से यह संकेत दिया कि हंसी न केवल तनाव को कम करती हैबल्कि शरीर और मन दोनों को ऊर्जावान बनाए रखने में मदद करती है। भारतीय परंपरा में हंसी और आनंद को जीवन का अभिन्न हिस्सा माना गया है और यही विचार इस सुभाषित में भी झलकता है।
प्रधानमंत्री पहले भी योगध्यान और भारतीय जीवन मूल्यों के माध्यम से स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की अपील करते रहे हैं। यह संदेश उसी कड़ी का हिस्सा माना जा रहा हैजिसमें वे लोगों को सरल उपायों के जरिए खुशहाल और संतुलित जीवन जीने के लिए प्रेरित करते हैं। उनका यह संदेश यह भी दर्शाता है कि प्राचीन भारतीय ज्ञान आज के आधुनिक दौर में भी उतना ही प्रासंगिक और उपयोगी है।कुल मिलाकरप्रधानमंत्री द्वारा साझा किया गया यह संस्कृत सुभाषित लोगों को यह याद दिलाता है कि हंसी न केवल चेहरे की मुस्कान हैबल्कि यह बेहतर स्वास्थ्यमानसिक शांति और जीवन में आनंद का आधार भी है।
