प्रधानमंत्री ने कहा कि पूज्य बापू का संपूर्ण जीवन अहिंसा, सत्य और मानव कल्याण के सिद्धांतों पर आधारित रहा। उन्होंने बिना हथियार के, केवल नैतिक बल और सत्य की शक्ति से न केवल भारत को स्वतंत्रता दिलाई, बल्कि पूरी दुनिया को शांति और सह-अस्तित्व का मार्ग दिखाया। अहिंसा का यह संदेश आज के अशांत वैश्विक वातावरण में और भी अधिक प्रासंगिक हो गया है।
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर साझा की गई अपनी पोस्ट में लिखा कि महात्मा गांधी ने मानवता की रक्षा के लिए सदैव अहिंसा पर बल दिया। उन्होंने कहा कि अहिंसा में वह शक्ति निहित है, जो बिना हिंसा और हथियार के भी दुनिया को बदल सकती है। प्रधानमंत्री द्वारा साझा किया गया संस्कृत सुभाषितम अहिंसा के दर्शन को गहराई से अभिव्यक्त करता है
अहिंसा परमो धर्मस्तथाऽहिंसा परन्तपः।
अहिंसा परमं सत्यं यतो धर्मः प्रवर्तते॥
इस सुभाषितम का तात्पर्य है कि अहिंसा सर्वोच्च कर्तव्य है और अहिंसा ही सर्वोच्च तपस्या है। अहिंसा को परम सत्य बताया गया है, जिससे सभी धर्मों और नैतिक मूल्यों की उत्पत्ति होती है। यह संदेश महात्मा गांधी के जीवन दर्शन का सार प्रस्तुत करता है, जिसमें उन्होंने मानवता, करुणा और नैतिकता को सर्वोपरि रखा।
प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में यह भी संकेत दिया कि अहिंसा केवल व्यक्तिगत आचरण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज और राष्ट्र के निर्माण का आधार भी है। बापू का अहिंसा का विचार सामाजिक समरसता, शांति और न्यायपूर्ण व्यवस्था की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यही कारण है कि महात्मा गांधी के सिद्धांत आज भी भारत की नीतियों और मूल्यों में प्रतिबिंबित होते हैं।
देशभर में शहीद दिवस के अवसर पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की जा रही है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री द्वारा साझा किया गया यह सुभाषितम न केवल बापू के प्रति श्रद्धा का प्रतीक है बल्कि देशवासियों के लिए यह संदेश भी है कि सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलकर ही स्थायी शांति और मानव कल्याण संभव है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह संदेश बापू के विचारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है।
