जयपुर। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को जाति और गोत्र छिपाने के आरोपों से जुड़े एक मामले में बड़ी कानूनी राहत मिली है। राजस्थान की जयपुर स्थित अपीलीय अदालत ने इस मामले में दायर परिवाद को खारिज करने के निचली अदालत के आदेश को बरकरार रखा है। इसके साथ ही राहुल गांधी के खिलाफ इस मामले में चल रही कानूनी प्रक्रिया पर विराम लग गया है। मामले की सुनवाई अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश एडीजे नीलम करवा की अदालत में हुई। अदालत ने मंगलवार को अपना फैसला सुनाते हुए परिवादी द्वारा दायर अपील को खारिज कर दिया। न्यायालय ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि निचली अदालत द्वारा 6 मई 2025 को दिया गया आदेश पूरी तरह से विधिसम्मत था और उसमें किसी भी प्रकार की कानूनी खामी नहीं पाई गई है।
क्या है पूरा मामला
यह मामला 19 फरवरी 2024 को दायर एक इस्तगासे से जुड़ा है, जिसमें आरोप लगाया गया था कि राहुल गांधी ने अपनी जाति एवं गोत्र से संबंधित जानकारी छिपाई है। इस आधार पर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की गई थी। हालांकि, निचली अदालत ने सभी तथ्यों और दस्तावेजों पर विचार करने के बाद इस इस्तगासे को खारिज कर दिया था। निचली अदालत के इस फैसले को चुनौती देते हुए परिवादी ने जयपुर की अपीलीय अदालत का दरवाजा खटखटाया था। अपील में दलील दी गई थी कि निचली अदालत ने तथ्यों का सही आकलन नहीं किया और मामले में पुनः सुनवाई की आवश्यकता है।
अपीलीय अदालत की टिप्पणी
अपील पर सुनवाई करते हुए एडीजे नीलम करवा की अदालत ने निचली अदालत के आदेश का गहन अध्ययन किया। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि निचली अदालत द्वारा 19 फरवरी 2024 को दायर इस्तगासे को खारिज किया जाना पूरी तरह कानून के अनुरूप है। आदेश में किसी प्रकार की कानूनी त्रुटि या प्रक्रियागत कमी नहीं पाई गई। अदालत ने यह भी कहा कि जब निचली अदालत का आदेश सही और विधिसम्मत है, तो उसमें हस्तक्षेप करने का कोई औचित्य नहीं बनता। इसी आधार पर अपीलीय अदालत ने परिवादी की याचिका को खारिज कर दिया।
राहुल गांधी के लिए राहत
इस फैसले को राहुल गांधी के लिए एक अहम कानूनी राहत के रूप में देखा जा रहा है। लोकसभा में विपक्ष के नेता होने के नाते उन पर पहले से ही कई राजनीतिक और कानूनी मामलों को लेकर नजर रहती है। ऐसे में जयपुर की अपीलीय अदालत का यह निर्णय उनके पक्ष में गया है।
राजनीतिक प्रतिक्रिया की संभावना
हालांकि इस मामले में अभी किसी राजनीतिक दल या राहुल गांधी की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन माना जा रहा है कि कांग्रेस इसे न्याय की जीत के रूप में पेश कर सकती है। वहीं, परिवादी के पास अब उच्च न्यायालय का रुख करने का विकल्प सैद्धांतिक रूप से खुला है। जयपुर की अपीलीय अदालत के इस फैसले ने स्पष्ट कर दिया है कि राहुल गांधी के खिलाफ जाति और गोत्र छिपाने के आरोपों से जुड़ा मामला कानूनी रूप से टिकाऊ नहीं पाया गया। निचली अदालत के आदेश को सही ठहराते हुए अपीलीय अदालत ने यह संदेश भी दिया है कि बिना ठोस कानूनी आधार के दायर याचिकाओं में हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता।
