नई दिल्ली। मुजफ्फरनगर में भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने युवा कार्यकर्ताओं को धरना और प्रदर्शन को लेकर बड़ा और सख्त संदेश दिया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अब धरना-प्रदर्शन सिर्फ औपचारिकता नहीं रहेगा। जो भी कार्यकर्ता आंदोलन करना चाहता है, उसे पूरी तैयारी के साथ मैदान में उतरना होगा। टिकैत ने युवाओं से कहा कि अगर विरोध करना है तो बोरिया-बिस्तर बांधकर आओ और कम से कम 72 घंटे तक धरने पर बैठे रहो, उससे पहले घर लौटने की कोई बात नहीं होनी चाहिए।
सोमवार को मुजफ्फरनगर के एक बेंक्वेट हॉल में आयोजित युवा कार्यकर्ता संवाद सम्मेलन में राकेश टिकैत सैकड़ों युवा कार्यकर्ताओं के साथ ट्रैक्टर पर सवार होकर पहुंचे। उनके पहुंचते ही कार्यकर्ताओं ने फूलों की वर्षा कर जोरदार स्वागत किया और पूरे कार्यक्रम में जोश और उत्साह का माहौल देखने को मिला। सम्मेलन को संबोधित करते हुए टिकैत ने कहा कि धरना और प्रदर्शन केवल प्रतीकात्मक कार्यक्रम नहीं हैं, बल्कि यह संघर्ष का सबसे मजबूत और अंतिम हथियार होते हैं।
उन्होंने कहा कि आजकल कई युवा कार्यकर्ता धरने को सिर्फ तीन-चार घंटे का कार्यक्रम समझ लेते हैं, जबकि असली धरना धैर्य, समर्पण और लगातार संघर्ष की मांग करता है।
टिकैत ने जोर देकर कहा कि धरना समाज और संगठन के लिए अपनी बात मजबूती से रखने का माध्यम है और इसे हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। इसी सोच के तहत उन्होंने ऐलान किया कि अब 35 साल से कम उम्र के युवा कार्यकर्ताओं के लिए विशेष ट्रेनिंग कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिसमें उन्हें संगठन के नियम, आंदोलन की मर्यादा और धरने-प्रदर्शन की अहमियत विस्तार से समझाई जाएगी।
राकेश टिकैत ने स्पष्ट किया कि अब जो भी कार्यकर्ता धरना देगा, उसे कम से कम 72 घंटे तक धरने पर बैठना होगा, चाहे इस दौरान कोई समझौता ही क्यों न हो जाए। उनका कहना था कि इससे कार्यकर्ताओं में अनुशासन आएगा और आंदोलन की गंभीरता बनी रहेगी।
कार्यक्रम के दौरान महानगर अध्यक्ष गुलबहार राव ने बताया कि यह देश में पहली बार इस तरह का युवा संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया है। इसका उद्देश्य नए युवाओं को संगठन से जोड़ना और पुराने, निष्क्रिय कार्यकर्ताओं को फिर से सक्रिय करना है। सम्मेलन में हजारों युवाओं ने हिस्सा लिया और 150 युवाओं को भारतीय किसान यूनियन की सदस्यता दिलाई गई।
राकेश टिकैत ने अपने संबोधन में सिर्फ धरना-प्रदर्शन तक ही बात सीमित नहीं रखी, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारियों पर भी जोर दिया। उन्होंने युवाओं से नशा नियंत्रण, गुटखा विरोध और सामाजिक जागरूकता से जुड़े अभियानों में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की। टिकैत ने कहा कि किसान आंदोलन केवल ट्रैक्टर मार्च या धरने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज को सही दिशा देने का भी माध्यम है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि धरना, पंचायत, महापंचायत और मीटिंग जैसे शब्द सिर्फ कार्यक्रमों के नाम नहीं हैं, बल्कि यह संगठन और किसान आंदोलन की संघर्षशील संस्कृति का हिस्सा हैं। युवाओं को चाहिए कि वे इन माध्यमों के जरिए अपने अधिकारों और मुद्दों को मजबूती से उठाना सीखें।
सम्मेलन में मौजूद युवा कार्यकर्ताओं ने भी माना कि राकेश टिकैत के विचार और उनके संघर्ष का तरीका प्रेरणादायक है। उन्होंने कहा कि अब धरना और प्रदर्शन को हल्के में नहीं लिया जाएगा और संगठन के नियमों के अनुसार पूरी निष्ठा से आंदोलन किया जाएगा।
राकेश टिकैत का संदेश साफ और सीधा हैअगर विरोध करना है तो पूरी तैयारी, समर्पण और धैर्य के साथ करना होगा। सिर्फ कुछ घंटों का धरना नहीं, बल्कि 72 घंटे तक डटे रहना ही सच्चे संघर्ष की पहचान है। इस सम्मेलन के जरिए यह भी साफ हो गया है कि भारतीय किसान यूनियन आने वाले समय में युवा शक्ति को केंद्र में रखकर आंदोलन को और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।मुजफ्फरनगर से निकला यह संदेश अब पूरे देश के युवाओं तक पहुंच रहा हैसंघर्ष का नाम धरना है, और धरने का नाम समर्पण।