घटना की शुरुआत 2 जनवरी 2026 को हुई थी, जब ये दोनों मासूम अपने घर के पास ही एक किराने की दुकान से सामान लेने निकले थे। खेलकूद की उम्र में दुकान तक गए ये बच्चे वापस घर नहीं लौटे। परिजनों ने काफी खोजबीन की, लेकिन जब बच्चों का पता नहीं चला तो 3 जनवरी को धुर्वा थाने में औपचारिक रूप से गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई गई। देखते ही देखते 10 दिन बीत गए लेकिन पुलिस के हाथ अब तक खाली हैं। बच्चों की सुरक्षित बरामदगी न होने से आक्रोशित ग्रामीणों ने रविवार को 12 घंटे के बंद का आह्वान किया, जिससे इलाके का आम जनजीवन पूरी तरह ठप हो गया।
इस बंद का नेतृत्व राष्ट्रीय जनता दल आरजेडी के प्रदेश महासचिव कैलाश यादव द्वारा गठित एक विशेष समिति ने किया। प्रदर्शनकारियों ने मौसीबाड़ी और धुर्वा गोल चक्कर जैसे प्रमुख स्थानों पर टायर जलाकर सड़कों को जाम कर दिया। सुबह से ही प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतर आए और पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन के कारण घंटों तक यातायात बाधित रहा जिससे राहगीरों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। कैलाश यादव ने कहा कि यह उन माता-पिता के लिए असहनीय पीड़ा का समय है जिनका हर पल अपने बच्चों की वापसी के इंतज़ार में बीत रहा है।
प्रशासनिक स्तर पर, रांची पुलिस ने बच्चों की तलाश के लिए 40 पुलिसकर्मियों की एक विशेष जांच टीम SIT का गठन किया है। हालांकि, इतने बड़े कार्यबल के बावजूद अब तक कोई ठोस जानकारी हाथ न लगना पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहा है। शनिवार की शाम को भी स्थानीय निवासियों ने मौसीबाड़ी से बिरसा चौक तक एक विशाल मशाल जुलूस निकालकर सो रहे प्रशासन को जगाने की कोशिश की थी। वर्तमान में स्थिति की गंभीरता को देखते हुए इलाके में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है और पुलिस ने विरोध प्रदर्शन के दौरान एक व्यक्ति को हिरासत में भी लिया है। पूरा इलाका अब बस एक ही दुआ और मांग कर रहा है अंश और अंशिका की सुरक्षित वापसी।
