नई दिल्ली। तेलंगाना के मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता रेवंत रेड्डी ने अपनी एक टिप्पणी से राज्य की राजनीति और धार्मिक माहौल में जबरदस्त विवाद पैदा कर दिया है। मंगलवार को हैदराबाद के गांधी भवन में तेलंगाना कांग्रेस कमेटी की कार्यकारिणी बैठक को संबोधित करते हुए, रेड्डी ने अपनी पार्टी की समावेशी और विविध प्रकृति को समझाने के लिए हिंदू धर्म के देवताओं पर एक विवादास्पद बयान दिया। इस बयान ने तुरंत ही राजनीतिक गलियारों और धार्मिक संगठनों के बीच आक्रोश पैदा कर दिया है।
रेवंत रेड्डी का आपत्तिजनक बयान
कांग्रेस की समावेशी प्रकृति को स्पष्ट करते हुए, मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने यह तर्क दिया कि जब हिंदू धर्म में ही देवताओं पर आम सहमति नहीं है, तो राजनीतिक नेताओं पर आम सहमति बनाना कठिन है। इसी दौरान उन्होंने देवताओं के वर्गीकरण को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की:
रेवंत रेड्डी ने देवताओं की तुलना करते हुए कुछ ऐसी टिप्पणियाँ कीं जो धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाली थीं, जिसका उद्देश्य कांग्रेस पार्टी के भीतर की विविधता को सही ठहराना था।
बयान पर तत्काल विवाद और प्रतिक्रियाएँ
मुख्यमंत्री के इस बयान के सामने आते ही तेलंगाना की राजनीति में भूचाल आ गया है। विभिन्न हिंदू संगठनों और विपक्षी राजनीतिक दलों ने इस टिप्पणी को धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला और अनावश्यक रूप से विवादास्पद बताया है। राजनीतिक विरोध: विपक्षी दलों विशेष रूप से बीजेपी ने इस बयान की कड़ी निंदा की है। बीजेपी नेताओं ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस जानबूझकर हिंदू धर्म का अपमान कर रही है और सत्ता में आने के बाद भी तुष्टिकरण की राजनीति कर रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की है। धार्मिक संगठनों का आक्रोश: कई धार्मिक नेताओं और हिंदू कार्यकर्ताओं ने इस बयान को असम्मानजनक करार दिया है। उनका कहना है कि मुख्यमंत्री जैसे संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को धार्मिक मामलों पर ऐसी हल्की और वर्गीकरण वाली टिप्पणी करने से बचना चाहिए था। कांग्रेस पर दबाव: इस विवाद ने कांग्रेस पार्टी पर भी दबाव बढ़ा दिया है, क्योंकि यह टिप्पणी एक ऐसे राज्य के मुख्यमंत्री ने की है जहाँ कांग्रेस हाल ही में सत्ता में आई है। पार्टी को अब इस विवाद को शांत करने और खुद को धार्मिक रूप से संवेदनशील साबित करने की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।
टिप्पणी का राजनीतिक महत्व
रेवंत रेड्डी की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब कांग्रेस पार्टी आगामी चुनावों और अपनी संगठनात्मक मजबूती पर ध्यान केंद्रित कर रही है। मुख्यमंत्री का उद्देश्य भले ही पार्टी की समावेशी प्रकृति को दर्शाना रहा हो, लेकिन देवताओं पर की गई टिप्पणी ने पार्टी की साख को खतरे में डाल दिया है और विपक्षी दलों को कांग्रेस पर हमला करने का एक बड़ा हथियार दे दिया है। यह घटना दर्शाती है कि धार्मिक और संवेदनशील मुद्दों पर नेताओं के बयानों को कितनी सावधानी से चुना जाना चाहिए। फिलहाल, तेलंगाना की राजनीति में यह बयान एक प्रमुख मुद्दा बन गया है और इसके कारण राज्य के राजनीतिक और सामाजिक माहौल में तनाव बना हुआ है।
