यह हादसा नोएडा में लगातार बढ़ते सुरक्षा जोखिमों की ओर इशारा करता है। सेक्टर 94 में जिस खाली प्लॉट में यह दुर्घटना हुई, वहां कोई बैरिकेडिंग या चेतावनी बोर्ड नहीं लगाया गया था। पहले भी नोएडा अथॉरिटी की लापरवाही के कारण कई मौतें हुई हैं। कुछ समय पहले आईटी इंजीनियर युवराज मेहता और अन्य लोग इसी तरह के खुले गड्ढों में दुर्घटनाग्रस्त हुए थे। सेक्टर 115 में एक निर्माणाधीन नाले के गड्ढे में गिरकर 25 वर्षीय युवक की मौत भी इसी श्रेणी में आती है।
स्थानीय लोगों और परिवारों की चिंता लगातार बढ़ रही है। हर्षित का परिवार गाजियाबाद के इंदिरापुरम में रहता है और सदमे में है। उन्होंने घर के बाहर स्पष्ट संदेश देकर किसी को अंदर आने से रोका हुआ है। हर्षित एमिटी यूनिवर्सिटी में बैचलर ऑफ फिजिकल एजुकेशन का छात्र था और युवा जीवन में ही इस तरह के हादसे में खो गया। हादसे ने न केवल परिवार को झकझोर दिया है, बल्कि नोएडा अथॉरिटी और निर्माण कंपनियों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि खुले गड्ढों और निर्माण स्थलों की निगरानी, चेतावनी बोर्ड और बैरिकेडिंग की कमी जानलेवा साबित हो सकती है। अधिकारियों ने पहले भी जोखिम वाले स्थानों पर सुरक्षा उपाय करने की बात कही थी, लेकिन कार्रवाई में देरी और नियमानुसार उपायों का अभाव लगातार बड़ी दुर्घटनाओं का कारण बन रहा है।
