नई दिल्ली। ESI (कर्मचारी राज्य बीमा) अस्पताल में इलाज के लिए आए सैकड़ों कर्मचारी और उनके परिजन गुरुवार के बाद शुक्रवार को भी गंभीर अव्यवस्था का शिकार हुए। लगातार दूसरे दिन सुबह के समय सर्वर ठप हो जाने के कारण रजिस्ट्रेशन (पर्चा बनाने) की प्रक्रिया पूरी तरह रुक गई, जिससे 150 से अधिक मरीज घंटों लाइन में खड़े रहने को मजबूर हुए।
घंटों इंतज़ार और निराशा
अस्पताल में रोजाना सैकड़ों कर्मचारी इलाज कराने पहुंचते हैं, जिनकी सैलरी से हर महीने बीमा राशि काटी जाती है। इसके बावजूद उन्हें समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा है।
सुबह 9 बजे से लाइन में लगे लोग दोपहर 1 बजे तक खड़े रहे, लेकिन रजिस्ट्रेशन नहीं हो सका। महिलाएं, बुजुर्ग और छोटे बच्चों को लेकर आए परिजन घंटों इंतज़ार में खड़े रहे।
एक महिला मरीज ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि हर महीने बीमा राशि कटवाने के बावजूद, “यहां रोज कोई न कोई दिक्कत रहती है। कभी डॉक्टर नहीं, कभी दवा नहीं, अब सर्वर बंद।”अधीक्षक डॉ. परविंदर के अनुसार, दोपहर 3 बजे तक तीनों रजिस्ट्रेशन विंडो खुल चुकी थीं और लाइन में केवल 7 लोग बचे थे।
प्रबंधन की सफाई: ‘दिक्कत हेडक्वार्टर स्तर की’
अस्पताल प्रबंधन ने इस गंभीर तकनीकी खराबी के लिए हेडक्वार्टर को जिम्मेदार ठहराया है।अधीक्षक डॉ. परविंदर ने कहा कि सुबह लोड ज्यादा रहने के कारण सर्वर में दिक्कत आई थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि सर्वर का संचालन स्थानीय स्तर पर नहीं, बल्कि हेडक्वार्टर स्तर से किया जाता है, इसलिए अस्पताल इसे सीधे ठीक नहीं कर सकता।अस्पताल ने तकनीकी टीम को जानकारी भेज दी है और जल्द स्थायी समाधान की उम्मीद जताई है।
रजिस्ट्रेशन तक सीमित नहीं हैं समस्याएं
श्रमिक कांग्रेस के नेता दीपक गुप्ता ने कहा कि ESI अस्पताल में समस्याएं सिर्फ सर्वर या रजिस्ट्रेशन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये एक व्यापक संकट का संकेत हैं।
उन्होंने डॉक्टरों और नर्सों की कमी, दवाओं की अनुपलब्धता और खराब सुविधाओं के कारण श्रमिकों को ढंग का इलाज न मिल पाने का मुद्दा उठाया।
विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी के कारण मरीजों को दूसरे संस्थानों में भेजा जाता है, और दवाओं के लिए मरीजों को बाहर से खरीदने को कहा जाता है।अस्पताल भवन में साफ-सफाई की कमी, आधुनिक मशीनों का अभाव और पुराने उपकरणों के कारण भी मरीजों को असुविधा होती है।
यह स्थिति उस ESI जैसी सरकारी संरचना पर सवाल खड़ा करती है, जो करोड़ों रुपये की बीमा राशि लेने के बावजूद अपने कर्मचारियों को बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाएँ नहीं दे पा रही है।
