नई दिल्ली। राजधानी लखनऊ में मंगलवार रात बीजेपी के 40 से अधिक ब्राह्मण विधायकों की बैठक ने सियासी माहौल गर्म कर दिया। यह बैठक औपचारिक सहभोज के बहाने आयोजित की गई थी, लेकिन इसे पार्टी में असंतोष के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। समाजवादी पार्टी के महासचिव और अखिलेश यादव के चाचा शिवपाल सिंह यादव ने कहा कि विधायकों को अगर उन्हें सम्मान नहीं मिल रहा है, तो उन्हें सपा में शामिल होने पर विचार करना चाहिए। उन्होंने मीडिया से बातचीत में बताया कि यह बैठक उनके अनुसार बीजेपी के भीतर असंतोष को दर्शाती है और यही वजह है कि नाराज विधायकों के लिए सपा एक विकल्प हो सकती है।
नाराज ब्राह्मण विधायक सपा में आएं, उन्हें मिलेगा पूरा सम्मान
शिवपाल यादव ने कहा कि बीजेपी में जातिगत भेदभाव मौजूद है। उन्होंने नाराज ब्राह्मण विधायकों को सपा में आने का आमंत्रण देते हुए कहा कि हमारी पार्टी में उन्हें पूरा सम्मान मिलेगा। शिवपाल ने आगे कहा कि बीजेपी में असंतोष और नाराजगी के कारण अलग-अलग समूह बैठक कर रहे हैं, जबकि समाजवादी पार्टी सभी को समान रूप से मान-सम्मान देती है। सपा के विधायक अतुल प्रधान ने भी इस मुद्दे पर टिप्पणी करते हुए बताया कि यह केवल ब्राह्मण समुदाय तक सीमित नहीं है। विभिन्न समुदायों के लोग भी सरकार से असंतुष्ट हैं और नाराजगी व्यक्त करने के लिए एकजुट हो रहे हैं। उनका मानना है कि ब्राह्मण विधायकों की बैठक बीजेपी को चुनौती देने और उन्हें हराने की दिशा में उठाया गया कदम है।
ब्राह्मण विधायकों की बैठक से बढ़ी सियासी हलचल
मंगलवार रात लखनऊ में कुशीनगर के बीजेपी विधायक पीएन पाठक के आवास पर ब्राह्मण विधायकों की एक बैठक हुई जिसे सहभोज के बहाने आयोजित किया गया। हालांकि सूत्रों का कहना है कि इस बैठक में अधिकारियों की मनमानी और ब्राह्मण समाज की अनदेखी को लेकर असंतोष जताया गया। वहीं, इस बैठक को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व के लिए चुनौती के रूप में भी देखा जा रहा है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह बैठक पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष और सत्ता संतुलन को लेकर सियासी चर्चा को और तेज कर सकती है।
