कोलंबो स्थित भारतीय हाई कमीशन ने जानकारी दी है कि ये पवित्र अवशेष 4 से 11 फरवरी तक गंगारामया मंदिर में सुरक्षित रखे जाएंगे। सार्वजनिक पूजा और दर्शन की शुरुआत 5 फरवरी से होगी। 11 फरवरी 2026 को यह पवित्र धरोहर वापस भारत लाई जाएगी। यह देवनीमोरी अवशेषों का पहला अंतरराष्ट्रीय सार्वजनिक प्रदर्शन माना जा रहा है।यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस घोषणा का हिस्सा है, जिसके तहत भारत अपनी बौद्ध विरासत को विश्व के साथ साझा कर रहा है। इसका उद्देश्य सीमाओं के पार सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंधों को मजबूत करना है। भारत सरकार की इस पहल को बौद्ध समुदायों के बीच ऐतिहासिक और भावनात्मक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
श्रीलंका में इस प्रदर्शनी के दौरान बड़ी संख्या में बौद्ध भिक्षु, स्थानीय श्रद्धालु और अंतरराष्ट्रीय तीर्थयात्री पहुंचने की उम्मीद है। सभी को भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों के दर्शन और श्रद्धांजलि देने का दुर्लभ अवसर मिलेगा।भारतीय हाई कमीशन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक हालिया भाषण का वीडियो साझा करते हुए कहा कि भारत वियतनाम से मंगोलिया और थाईलैंड से रूस तक अपनी बौद्ध विरासत को साझा करता रहा है। जैसे ही देवनीमोरी अवशेष श्रीलंका पहुंचेंगे, यह स्पष्ट होगा कि भारत भगवान बुद्ध के शांति और करुणा के संदेश के जरिए दुनिया को कैसे जोड़ रहा है।
इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि हाल के महीनों में भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेष जहां भी प्रदर्शित किए गए, वहां आस्था और भक्ति की लहर देखने को मिली।भारत में श्रीलंका की हाई कमिश्नर महिशिनी कोलोन ने इस पहल को श्रीलंका के लिए एक अनोखा आशीर्वाद बताया। उन्होंने कहा कि यह अवशेषों का पहला अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शन है और इसके लिए भारत सरकार तथा सभी सहयोगी संस्थाओं का आभार व्यक्त किया।
गौरतलब है कि जनवरी की शुरुआत में नई दिल्ली के राय पिथौरा कल्चरल कॉम्प्लेक्स में भगवान बुद्ध से जुड़े पवित्र पिपराहवा अवशेषों की अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी का उद्घाटन भी प्रधानमंत्री मोदी ने किया था। उस अवसर पर उन्होंने बौद्ध विरासत स्थलों के विकास और युवा पीढ़ी को बौद्ध मूल्यों से जोड़ने की दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई थी।
