शोक में था महाराष्ट्रदिखाई गई जल्दबाजी- सामना
सामना के संपादकीय में कहा गया है कि डिप्टी CM शपथ समारोह महाराष्ट्र के राजनीतिक और सांस्कृतिक मूल्यों के खिलाफ है. आरोप लगाया गया कि अजित पवार के निधन के बाद राज्य शोक में थालेकिन इसी दौरान सत्ता की जल्दबाजी दिखाई गईUBT का कहना है कि यह फैसला संवेदनशीलता और परंपराओं की अनदेखी का उदाहरण है.लेख में यह भी कहा गया कि BJP हिंदुत्व और संस्कृति की बात करती हैलेकिन व्यवहार में अपने ही रीति-रिवाजों का पालन नहीं करती. शोक काल में सत्ता प्रदर्शन को सामना ने बेहद घटिया राजनीति करार दिया है.
सुनेत्रा पवार की नियुक्ति पर सवाल
संपादकीय में सुनेत्रा पवार को उप मुख्यमंत्री बनाए जाने पर भी सवाल उठाए गए हैं. सामना का कहना है कि यह पद उनकी व्यक्तिगत काबिलियत या राजनीतिक अनुभव के आधार पर नहीं दिया गया. लेख में तंज कसते हुए लिखा गया है कि यह नियुक्ति पूरी तरह सत्ता संतुलन और अंदरूनी जोड़तोड़ का परिणाम है. सामना के अनुसारशरद पवार और सुप्रिया सुले की प्रतिक्रियाएं इस बात की ओर इशारा करती हैं कि परिवार को भी इस शपथ की पूर्व जानकारी नहीं थी. इससे पूरे घटनाक्रम पर संदेह और गहराता है.
NCP की स्थिति और फडणवीस का नियंत्रण
UBT के मुखपत्र ने NCP की मौजूदा हालत पर तीखी टिप्पणी की है. संपादकीय में कहा गया है कि पार्टी की नाव का कैप्टन अब नहीं रहा और फिलहाल इसे देवेंद्र फडणवीस नियंत्रित कर रहे हैं. सामना का आरोप है कि NCP अब स्वतंत्र राजनीतिक इकाई नहीं रह गई है.लेख में यह भी कहा गया है कि पार्टी के भीतर नेतृत्व और दिशा को लेकर भ्रम है. खुले तौर पर यह संकेत दिया गया कि सत्ता में बने रहने के लिए समझौते किए जा रहे हैंजिससे पार्टी की वैचारिक पहचान कमजोर हो रही है.
संपादकीय के अंत में UBT ने मौजूदा राजनीतिक हालात को बेहद घटिया राजनीति बताया है. सामना का कहना है कि सत्ता की लालसा ने संवेदनशीलतासंस्कृति और नैतिकता को पीछे छोड़ दिया है. यह स्थिति महाराष्ट्र की राजनीति के लिए खतरनाक संकेत है.UBT ने इशारों में कहा है कि आने वाले समय में इसका राजनीतिक असर दिखेगा. सामना के मुताबिकयह पूरा घटनाक्रम केवल पद और नियंत्रण की लड़ाई हैजिसमें जनता और मूल्यों को दरकिनार कर दिया गया है.
