नई दिल्ली। भारत में गर्मियों का लोकप्रिय पेय रूह अफ़जा अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद स्पष्ट रूप से फ्रूट ड्रिंक के रूप में मान्यता प्राप्त कर चुका है। लंबे समय से चल रही टैक्स विवाद में बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि रूह अफ़जा को सिर्फ इसलिए उच्च टैक्स वाले ब्रैकेट में नहीं रखा जा सकता क्योंकि इसे शरबत के रूप में बेचा जाता है।
जस्टिस बीवी नागरत्ना और आर महादेवन की बेंच ने सुनवाई के दौरान यह स्पष्ट किया कि रूह अफ़जा फलों से बनाया जाता है और इसे केवल पानी में मिलाकर पीया जाता है। इसलिए इसे टैक्स कानून के तहत फ्रूट ड्रिंक माना जाएगा।
विवाद की जड़
यह मामला हमदर्द वक्फ लैबोरेटरीज की अपील पर सुना गया। सवाल यह था कि रूह अफ़जा, जिसमें केवल 10% फ्रूट जूस होता है और जिसे इनवर्ट शुगर सिरप व हर्बल डिस्टिलेट के साथ मिलाया जाता है, कानूनी रूप से फ्रूट ड्रिंक कहलाया जा सकता है या नहीं।
इलाहाबाद हाईकोर्ट और टैक्स अधिकारियों के 2018 के फैसलों को सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया। इन फैसलों में रूह अफ़जा को उत्तर प्रदेश वैल्यू एडेड टैक्स एक्ट के तहत 12.5% टैक्सेबल अनक्लासिफाइड आइटम के रूप में देखा गया था।
सुप्रीम कोर्ट का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि रूह अफ़जा UPVAT एक्ट की शेड्यूल II पार्ट A की एंट्री 103 के तहत फ्रूट ड्रिंक/प्रोसेस्ड फ्रूट प्रोडक्ट के रूप में आएगा। इस श्रेणी पर 1 जनवरी 2008 से 31 मार्च 2012 तक 4% रियायती VAT दर लागू होती थी।
मामले में अधिकारियों ने फूड सेफ्टी रेगुलेशन का हवाला देते हुए कहा था कि फ्रूट सिरप में कम से कम 25% फ्रूट जूस होना चाहिए। चूंकि रूह अफ़जा में केवल 10% जूस होता है, इसलिए इसे नॉन-फ्रूट सिरप बताया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि फूड सेफ्टी कानून टैक्सिंग कानून की व्याख्या को नियंत्रित नहीं कर सकता।