सोमनाथ स्वाभिमान पर्व और 1000 साल की यात्रा
सोमनाथ मंदिर इस समय दो महत्वपूर्ण कारणों से चर्चा में है। एक तरफ, यह वर्ष 1026 में महमूद गजनवी द्वारा मंदिर पर हमले और इसके ध्वस्त होने के 1000 साल पूरे होने का समय है। दूसरी तरफ यह 11 मई 1951 को स्वतंत्र भारत में सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण की 75वीं वर्षगांठ भी है। पीएम मोदी ने इस खास मौके पर इस समारोह को सोमनाथ स्वाभिमान पर्व का नाम दिया।
सोमनाथ की दिव्यता का उद्घाटन
पीएम मोदी ने कहा सोमनाथ शाश्वत दिव्यता की एक ज्योति के रूप में खड़ा है। सोमनाथ की पावन धरा से निकला यह प्रकाशपुंज पूरे विश्व को भारत की सांस्कृतिक शक्ति का संदेश दे रहा है। उनके मुताबिक सोमनाथ सिर्फ एक मंदिर नहीं बल्कि यह हमारे समाज और संस्कृति की हिम्मत और गौरव का प्रतीक है।
ड्रोन शो और आधुनिक तकनीक का संगम
पीएम मोदी ने सोमनाथ मंदिर परिसर में भव्य ड्रोन शो देखने का अनुभव साझा किया। इस अद्भुत शो में प्राचीन आस्थाओं के साथ आधुनिक तकनीक का तालमेल हर किसी को मंत्रमुग्ध कर गया। उन्होंने कहा कि सोमनाथ का यह प्रकाशपुंज पूरी दुनिया में भारत की सांस्कृतिक शक्ति का संदेश दे रहा है।
ॐ का महत्व
सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के दौरान पीएम मोदी ने ॐ का विशेष महत्व बताया। उन्होंने कहा, ॐ हमारे वेदों, शास्त्रों पुराणों उपनिषदों और वेदांत का सार है। ॐ ही ध्यान का मूल है, और योग का आधार है। ॐ ही साधना में साध्य है और ॐ ही शब्द ब्रह्म का स्वरूप है। पीएम मोदी ने इस दौरान 1000 सेकंड्स तक सामूहिक रूप से ओंकार नाद का उच्चारण किया जिससे माहौल में अद्भुत ऊर्जा का संचार हुआ।
शौर्य यात्रा का आयोजन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी यात्रा की शुरुआत शौर्य यात्रा से की, जो सोमनाथ के शंख सर्किल से शुरू हुई। इस यात्रा में पीएम मोदी ने डमरू बजाया और यात्रा एक किलोमीटर लंबी रही। इसके बाद उन्होंने सोमनाथ मंदिर में दर्शन और पूजा अर्चना की।
अगला कदम सार्वजनिक सभा
इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी ने सुबह 11 बजे सद्भावना ग्राउंड में सार्वजनिक सभा को संबोधित किया जहां उन्होंने अपने संदेशों और विचारों से उपस्थित जनसमूह को प्रेरित किया।
