उद्घाटन समारोह के दौरान प्रधानमंत्री ने ‘सेवा तीर्थ’ की पट्टिका का अनावरण किया। भवन पर देवनागरी लिपि में ‘सेवा तीर्थ’ और उसके नीचे ‘नागरिक देवो भव’ अंकित है, जो शासन की नागरिक-केंद्रित सोच को दर्शाता है। उद्घाटन के बाद प्रधानमंत्री ने नए कार्यालय में महिलाओं, युवाओं, किसानों और कमजोर वर्गों से जुड़े कई अहम प्रस्तावों की फाइलों पर हस्ताक्षर किए।
इन फैसलों में पीएम राहत योजना के तहत सड़क दुर्घटना पीड़ितों को ₹1.5 लाख तक कैशलेस इलाज की सुविधा, ‘लखपति दीदी’ योजना का लक्ष्य 3 करोड़ से बढ़ाकर 6 करोड़ करना, कृषि अवसंरचना कोष की राशि 1 लाख करोड़ से बढ़ाकर 2 लाख करोड़ करना और 10,000 करोड़ के कोष के साथ स्टार्टअप इंडिया फंड ऑफ फंड्स 2.0 को मंजूरी देना शामिल है। सरकार का दावा है कि इन कदमों से ग्रामीण अर्थव्यवस्था, महिला सशक्तिकरण और स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूती मिलेगी।
नई दिल्ली के दारा शिकोह रोड स्थित एग्जीक्यूटिव एन्क्लेव में बना ‘सेवा तीर्थ’ परिसर लगभग 2.26 लाख वर्ग फीट क्षेत्र में फैला है और इसे करीब 1189 करोड़ की लागत से तैयार किया गया है। पहले इस परियोजना का नाम ‘एग्जीक्यूटिव एन्क्लेव’ था, जिसे दिसंबर 2025 में बदलकर ‘सेवा तीर्थ’ कर दिया गया। परिसर में तीन इमारतें हैंसेवा तीर्थ-1 में PMO, सेवा तीर्थ-2 में कैबिनेट सचिवालय और सेवा तीर्थ-3 में नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल सचिवालय (NSCS) तथा राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल का कार्यालय स्थित है।
यह पूरा कॉम्प्लेक्स केंद्र सरकार के महत्वाकांक्षी सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना का हिस्सा है। इसी परियोजना के तहत नया संसद भवन और कर्तव्य पथ का निर्माण किया गया है। कर्तव्य भवन-1 और 2 में वित्त, रक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि सहित कई प्रमुख मंत्रालयों को स्थान दिया गया है। भवनों को 4-स्टार GRIHA ग्रीन बिल्डिंग मानकों के अनुरूप डिजाइन किया गया है, जिनमें नवीकरणीय ऊर्जा, जल संरक्षण, वेस्ट मैनेजमेंट और स्मार्ट सुरक्षा प्रणालियां शामिल हैं।
सरकार का कहना है कि पहले कई मंत्रालय अलग-अलग पुराने भवनों में फैले हुए थे, जिससे तालमेल की कमी, देरी और रखरखाव पर अधिक खर्च जैसी समस्याएं सामने आती थीं। नए एकीकृत परिसर से प्रशासनिक कार्यों में तेजी, समन्वय और पारदर्शिता बढ़ेगी।
आने वाले समय में नॉर्थ ब्लॉक और साउथ ब्लॉक की ऐतिहासिक इमारतों को ‘युगे-युगेन भारत नेशनल म्यूजियम’ में बदलने की योजना है, जहां भारत की सभ्यता और विरासत को प्रदर्शित किया जाएगा। इस बदलाव के साथ केंद्र सरकार का प्रशासनिक ढांचा एक नए और आधुनिक दौर में प्रवेश कर गया है।
