प्रधानमंत्री ने बताया कि मुद्रा योजना की सफलता का रहस्य इसकी सुलभता और वित्तीय समावेशन में निहित है। बिना गिरवी के ऋण उपलब्ध कराकर इसने अनौपचारिक ऋण पर निर्भरता कम की है और जमीनी स्तर पर ऋण अनुशासन को मजबूत किया है। योजना के माध्यम से पहली बार उद्यमिता की ओर बढ़ने वाले लोग, विशेषकर महिलाएं और वंचित समुदाय, अब अपने छोटे व्यवसाय शुरू कर रहे हैं। इससे सूक्ष्म व्यवसायों का विकास हुआ है और धीरे-धीरे ये अनौपचारिक उद्यम भारत की औपचारिक आर्थिक संरचना का हिस्सा बन रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि मुद्रा योजना ने युवा शक्ति और नारी शक्ति पर सकारात्मक प्रभाव डाला है। यह योजना अवसर सुलभ करने, नई पहलों को प्रोत्साहित करने और हर सपने को साकार करने के लिए समर्थन देने वाली आर्थिक सोच की मिसाल है। बीते 11 वर्षों में इस योजना ने करोड़ों युवाओं को उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ाया है और देश में रोजगार सृजन की दिशा बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
मुद्रा योजना के अंतर्गत अब तक कुल 52.37 करोड़ खाते खोले गए हैं और लगभग 33.65 लाख करोड़ रुपये का बिना गारंटी का लोन प्रदान किया गया है। लाभार्थियों में करीब 70 प्रतिशत महिलाएं हैं, जबकि कुल लाभार्थियों में 50 प्रतिशत एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के लोग शामिल हैं। यह आंकड़े इस योजना की व्यापक पहुंच और समाज के हर वर्ग में आर्थिक सशक्तिकरण की सफलता को दर्शाते हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मुद्रा योजना ने बेरोजगार युवाओं को जॉब सीकर्स की भूमिका से जॉब क्रिएटर्स की दिशा में आगे बढ़ाया है। छोटे ऋण और स्थानीय विचारों के जरिए युवा उद्यमियों ने अपने व्यवसाय शुरू किए हैं और आर्थिक परिवर्तन की नींव मजबूत की है। इससे छोटे उद्यमों का विकास हुआ है, स्थानीय रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं और देश की अर्थव्यवस्था की जमीनी संरचना मजबूत हुई है।
मुद्रा योजना ने महिलाओं और वंचित वर्गों को आत्मनिर्भर बनने का अवसर दिया है। इससे न केवल आर्थिक रूप से उनका सशक्तिकरण हुआ है, बल्कि समाज में उनके महत्व और नेतृत्व की भावना भी बढ़ी है। प्रधानमंत्री ने कहा कि योजना ने चुपचाप भारत की अर्थव्यवस्था की नींव को नया आकार दिया है और स्थानीय स्तर पर उद्यमिता को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाई है।
