प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा, 2026 की आप सभी को बहुत-बहुत शुभकामनाएं। कामना करते हैं कि यह वर्ष हर किसी के लिए नई आशाएं, नए संकल्प और नया आत्मविश्वास लेकर आए। यह वर्ष सभी के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन, प्रगति और नई ऊर्जा का स्रोत बने। हम सभी को अपने जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा दे और हमें अपने कर्तव्यों और जिम्मेदारियों को निभाने की क्षमता प्रदान करे।प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि प्राचीन भारतीय ज्ञान हमारी जीवन दृष्टि को दिशा देने में अत्यंत सहायक है। उन्होंने संस्कृत सुभाषितम का उदाहरण देते हुए बताया:
ज्ञानं विरक्तिरैश्वर्यं शौर्यं तेजो बलं स्मृतिः। स्वातन्त्र्यं कौशलं कान्तिर्धैर्यं मार्दवमेव च ॥
इसका अर्थ है कि व्यक्ति का जीवन केवल भौतिक लाभ और सुख की प्राप्ति तक सीमित नहीं होना चाहिए। जीवन में ज्ञान होना चाहिए, जिससे व्यक्ति सही निर्णय ले सके और सच्चाई का मार्ग अपनाए। वैराग्य से जीवन में संतुलन और नियंत्रण आता है, जबकि ऐश्वर्य और शक्ति व्यक्ति को कठिन परिस्थितियों में साहस और आत्मविश्वास प्रदान करते हैं। स्मृति और स्वतंत्रता का होना भी आवश्यक है, जिससे व्यक्ति अपने अनुभवों से सीखकर स्वतंत्र रूप से निर्णय ले सके। कौशल और प्रतिभा हमारे कार्यों में दक्षता लाती हैं, वहीं धैर्य और कोमलता जीवन के हर संघर्ष और चुनौती में हमें स्थिरता और मानवीय संवेदनशीलता प्रदान करते हैं।प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में यह भी जोर दिया कि प्रत्येक व्यक्ति को न केवल व्यक्तिगत विकास की ओर ध्यान देना चाहिए, बल्कि समाज और राष्ट्र की भलाई के लिए भी योगदान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि नए वर्ष का आगमन नए अवसर और नई जिम्मेदारियां लेकर आता है, और हमें इस अवसर का उपयोग अपने व्यक्तित्व और समाज के उत्थान के लिए करना चाहिए।
इस सुभाषितम के माध्यम से प्रधानमंत्री ने सभी नागरिकों को यह प्रेरणा दी कि जीवन का उद्देश्य केवल सफलता और सुख प्राप्त करना नहीं है, बल्कि सद्गुणों और नैतिक मूल्यों के माध्यम से अपने और समाज के जीवन को समृद्ध बनाना है। उन्होंने यह संदेश भी दिया कि सच्ची उपलब्धि वही है जो ज्ञान, साहस, स्वतंत्रता और धैर्य के साथ जीवन में संतुलन बनाए।प्रधानमंत्री के इस संदेश ने देशवासियों में नए वर्ष 2026 को सकारात्मक दृष्टिकोण और उच्च आदर्शों के साथ迎 करने की भावना पैदा की है। उनके अनुसार, यह वर्ष सभी के लिए नई आशाएं, नई ऊर्जा और नई प्रेरणा का स्रोत बने।
