नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को खेल संस्थाओं के संचालन को लेकर सख्त रुख अपनाया। अदालत ने कहा कि क्रिकेट संघों की कमान ऐसे लोगों के हाथ में होनी चाहिए जिन्होंने खुद क्रिकेट खेला हो और संन्यास लिया हो, न कि उन लोगों के पास जिन्हें खेल की बुनियादी समझ तक नहीं है। शीर्ष अदालत महाराष्ट्र क्रिकेट संघ से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ ने बॉम्बे हाईकोर्ट के उस आदेश में हस्तक्षेप से इनकार कर दिया, जिसमें एमसीए के चुनावों पर रोक लगाई गई थी। ये चुनाव छह जनवरी को प्रस्तावित थे। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में भाई-भतीजावाद और पक्षपात के आरोपों को आधार बनाया था।
सदस्यता बढ़ोतरी पर कोर्ट की आपत्ति
सुनवाई के दौरान प्रधान न्यायाधीश ने एमसीए में सदस्यों की संख्या अचानक बढ़ाए जाने पर सवाल उठाए। रिकॉर्ड का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा कि वर्ष 1986 से 2023 तक संघ में 164 सदस्य थे, लेकिन इसके बाद बहुत कम समय में संख्या तेजी से बढ़ी। प्रधान न्यायाधीश ने टिप्पणी की, “इतने वर्षों में 164 सदस्य और फिर अचानक बंपर इजाफा कैसे?”
एमसीए और एनसीपी-एसपी विधायक रोहित पवार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक सिंघवी ने दलील दी कि सदस्यता प्रक्रिया एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली समिति की निगरानी में हुई थी। उन्होंने बताया कि समिति ने 48 आवेदनों को खारिज भी किया। साथ ही यह आरोप लगाया गया कि चैरिटी आयुक्त ने कैबिनेट से सलाह लिए बिना प्रशासक नियुक्त कर दिया। पूर्व अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों को देने की बात
प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि यदि संघ अपनी सदस्य संख्या 300 तक बढ़ाना चाहता है, तो पद पूर्व अंतरराष्ट्रीय और संन्यास ले चुके खिलाड़ियों के लिए आरक्षित होने चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत जैसे क्रिकेट प्रेमी देश में काबिल खिलाड़ियों की कोई कमी नहीं है। कोर्ट ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा, “आप ऐसे लोगों को क्यों ला रहे हैं जिन्हें खेल की समझ नहीं है, जिन्हें बल्ला पकड़ना तक नहीं आता? हमें मजबूर न करें कि हम इस पर और कड़ी प्रतिक्रिया दें।
क्या है मामला
बॉम्बे हाईकोर्ट का यह आदेश केदार जाधव की याचिका पर आया था। उन्होंने एमसीए की मतदाता सूची में लगभग 401 नए सदस्यों को जोड़े जाने पर सवाल उठाते हुए चुनाव पर रोक की मांग की थी। जाधव का आरोप था कि इनमें से कई सदस्य एनसीपी-एसपी विधायक रोहित पवार के करीबी रिश्तेदार या उनसे राजनीतिक-व्यावसायिक रूप से जुड़े लोग हैं, जिनमें उनकी पत्नी कुंती पवार और सांसद सुप्रिया सुले की बेटी भी शामिल हैं। याचिका में यह भी कहा गया था कि नए जोड़े गए कई सदस्य एनसीपी-एसपी से सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं, जिससे निष्पक्ष चुनाव पर सवाल खड़े होते हैं।