ताजा घटनाक्रम के अनुसार, गुरुवार शाम सांबा जिले के रामगढ़ सेक्टर और पुंछ के देगवार व मनकोट इलाकों में पाकिस्तानी ड्रोन मंडराते देखे गए। रामगढ़ के चक बबरल गांव के ऊपर शाम करीब 7:15 बजे एक संदिग्ध वस्तु कुछ मिनटों तक उड़ती दिखी, जबकि पुंछ में शाम 6:25 बजे तैन से टोपा की ओर ड्रोन जैसी वस्तु जाती नजर आई। इन गतिविधियों के तुरंत बाद सेना ने अपने एंटी-अनमैन्ड एरियल सिस्टम को सक्रिय कर दिया और संबंधित इलाकों की घेराबंदी कर दी।
इससे पहले 13 जनवरी को राजौरी जिले में दो बार पाकिस्तानी ड्रोन देखे गए थे, जिन पर जवानों ने फायरिंग की, जिसके बाद वे पाक अधिकृत कश्मीर की ओर लौट गए। वहीं, 11 जनवरी को नौशेरा सेक्टर में जवानों ने मशीन गन से फायरिंग कर ड्रोन की घुसपैठ को नाकाम किया था। सुरक्षा एजेंसियों को अंदेशा है कि पाकिस्तान इन ड्रोनों का उपयोग भारतीय सेना की चौकियों की टोह लेने या फिर आतंकियों के लिए हथियारों और नशीले पदार्थों की खेप गिराने के लिए कर रहा है। उल्लेखनीय है कि 9 जनवरी को सांबा के पालूरा गांव में ड्रोन द्वारा गिराई गई एक खेप बरामद हुई थी, जिसमें पिस्तौल, मैगजीन और ग्रेनेड शामिल थे।
इस तनावपूर्ण स्थिति के बीच, आर्मी चीफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने स्पष्ट संदेश दिया है कि भारतीय सेना किसी भी आतंकी या सैन्य दुस्साहस का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने बताया कि सीमा पार अब भी 8 आतंकी कैंप सक्रिय हैं और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत सेना हर हरकत पर नजर रख रही है। इसके अतिरिक्त, राजौरी के काकोरा गांव में सेना ने समय रहते 3 किलो वजन का एक संदिग्ध बरामद कर उसे नष्ट कर दिया, जिससे एक बड़ी आतंकी साजिश विफल हो गई। गणतंत्र दिवस को देखते हुए पूरी घाटी और सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।
