इस कार्रवाई पर कांग्रेस ने नाराजगी व्यक्त की है। इंडियन यूथ कांग्रेस ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट शेयर करते हुए पुलिस पर सत्ता पक्ष में काम करने का आरोप लगाया। पोस्ट में बताया गया कि आधी रात को दिल्ली पुलिस ने ड्यूटी मजिस्ट्रेट के सामने रिमांड बढ़ाने की अर्जी दी, जिसे न्यायालय ने अवैध बताते हुए खारिज कर दिया और जमानत आदेश दिया।
हालांकि, जब चिब के वकील जमानत मुचलके आदि की कानूनी प्रक्रिया पूरी कर रहे थे, दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच चुपके से ड्यूटी मजिस्ट्रेट के आदेश के खिलाफ सेशंस कोर्ट पहुंच गई। बिना पक्ष सुने ही जमानत आदेश पर स्टे लगा दिया गया और अगली सुनवाई की तारीख 6 मार्च तय की गई।
यूथ कांग्रेस ने अपनी पोस्ट में कहा कि संगठन न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान करता है और इस आदेश के खिलाफ हर कानूनी कदम उठाने पर विचार कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि दिल्ली पुलिस और सरकार के प्रयास असफल होंगे। यूथ कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस नेताओं और कार्यकर्ताओं को सलाखों के पीछे रखकर अपनी मंशा के अनुरूप भारत विरोधी ट्रेड डील पर सवालों से बचना चाहती है।
बताया गया कि हाल ही में दिल्ली में हुए AI समिट के दौरान उदय भानु चिब और कई यूथ कांग्रेस नेताओं ने शर्टलेस प्रोटेस्ट किया था। मामले में दिल्ली पुलिस ने चिब समेत देश के अलग-अलग राज्यों से कांग्रेस कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया था। पिछले दिनों कोर्ट ने चिब को जमानत दे दी थी, लेकिन रिहाई से पहले पुलिस ने सेशंस कोर्ट में अपील की, और कोर्ट ने जमानत पर स्टे लगा दिया। इसके बाद चिब को तिहाड़ जेल भेज दिया गया। यूथ कांग्रेस ने यह स्पष्ट किया कि युवा-किसान विरोधी ट्रेड डील और अन्य गिरफ्तारियों के खिलाफ उनका संघर्ष और तेज होगा और अंततः सच्चाई और न्याय की जीत होगी।
