ह्यूमन राइट्स काउंसिल ऑफ़ बलूचिस्तान के डेटा के अनुसार, पिछले 3 सालों में बलूचिस्तान से 1713 युवा जबरन गायब हुए हैं। इसी अवधि में 390 से अधिक युवाओं के गायब होने और 80 से ज्यादा शव मिलने के मामले सामने आए। स्थानीय मानवाधिकार संगठन Baloch Yakjehti Committee का कहना है कि ये घटनाएं अलग-थलग नहीं हैं बल्कि व्यवस्थित पैटर्न का हिस्सा हैं।
जुनैद अहमद, 22 वर्षीय ग्रेजुएशन छात्र, सुराब का निवासी, 23 जनवरी 2026 को जबरन उठाया गया। क्वेटा के एक अस्पताल से ईगल फोर्स और काउंटर टेररिज्म डिपार्टमेंट ने उसे बिना वारंट हिरासत में लिया। 15 फरवरी को उसका शव मिला, जिस पर गोली के निशान थे।
पंजगुर के मैट्रिक छात्र जंगीयान बलोच को 26 मई 2025 को फ्रंटियर कॉर्प्स और ISI के डेथ स्क्वाड ने उठाया था। 15 फरवरी को उसका शव शापतान इलाके में मिला।
17 वर्षीय मुहनास बलोच को 14 फरवरी को स्थानीय सुरक्षा एजेंसियों ने उसके घर से उठाकर गोली मार दी। वहीं नवाब अब्दुल्ला, जिसे मई 2025 में उठाया गया था, का शव 14 फरवरी को घर के बाहर फेंक दिया गया।
बलूचिस्तान में युवाओं को जबरन गायब करने की घटनाएं साल 2000 से लगातार हो रही हैं, जब से क्षेत्र में सशस्त्र विद्रोह शुरू हुआ। पाकिस्तानी सेना और ISI आज़ादी आंदोलन में शामिल युवाओं को अवैध हिरासत में लेने के बाद मार देती है या उनके गुटों में शामिल करवा देती है।
बलूचिस्तान प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर इलाका है सोना, चांदी, यूरेनियम, रेयर अर्थ मिनरल्स और क़ीमती रत्नों से संपन्न। बावजूद इसके, गृह युद्ध और हिंसा की वजह से स्थानीय आबादी इन संसाधनों के लाभ से वंचित है। पाकिस्तान की सत्ता में बैठे नेता और विदेशी साझेदार इन संसाधनों का फायदा उठा रहे हैं, जबकि आम बलूच युवा हिंसा और जबरन गायब होने की त्रासदी का शिकार हो रहे हैं।
