नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तुलना में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग को अधिक ताकतवर माना जा रहा है। राजनीतिक विशेषज्ञ इयन ब्रेमर का कहना है कि कई मामलों में ये दोनों नेता ट्रंप की तुलना में बेहतर स्थिति में हैं।
ब्रेमर ने मीडिया से बातचीत में कहा, “अमेरिका भले ही दुनिया की सबसे शक्तिशाली अर्थव्यवस्था है, लेकिन इसका नेतृत्व करने वाला ट्रंप सबसे ताकतवर नेता नहीं माना जा सकता। शी जिनपिंग इस मामले में आगे हैं। उनका कारण सरल है: उन्हें मिडटर्म चुनाव की चिंता नहीं, और उनके पास स्वतंत्र न्यायपालिका पर नियंत्रण है। वहीं, ट्रंप तीन सालों में अपने पद से बाहर होंगे, लेकिन जिनपिंग लंबे समय तक सत्ता में बने रहेंगे।”
ब्रेमर ने यह भी कहा कि पीएम मोदी की लंबी कार्यकाल अवधि उन्हें नीति निर्माण में स्थिरता और लंबे समय तक प्रभाव दिखाने की क्षमता देती है। “मोदी की निरंतरता और लंबे समय तक सत्ता में बने रहने की स्थिति उन्हें कई यूरोपीय नेताओं की तुलना में ज्यादा प्रभावशाली बनाती है,” उन्होंने कहा।
ट्रंप के शांति प्रयासों में सहयोगियों की कमी
इसी बीच ट्रंप ने हमास और इजराइल के बीच युद्धविराम सुनिश्चित करने के लिए अपना ‘शांति बोर्ड’ लॉन्च किया। हालांकि, अमेरिका के कई प्रमुख सहयोगियों ने इसमें भाग लेने से इनकार कर दिया। रूस ने अभी निर्णय नहीं लिया है, ब्रिटेन ने हस्ताक्षर करने से साफ मना कर दिया है। फ्रांस, नॉर्वे और स्वीडन ने भी बोर्ड में शामिल न होने का संकेत दिया। फ्रांसीसी अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि उनका देश गाजा में शांति की दिशा में प्रयासों का समर्थन करता है, लेकिन यह बोर्ड संयुक्त राष्ट्र के मुख्य मंच की जगह नहीं ले सकता।
