पार्टी ने भारत, भूटान, नेपाल, म्यांमार, श्रीलंका, मालदीव और थाइलैंड के साथ शांतिपूर्ण और मित्रतापूर्ण रिश्तों को प्राथमिकता देने का भरोसा दिया है। इसके जरिए क्षेत्रीय शांति, स्थिरता और साझा समृद्धि को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है। जमात-ए-इस्लामी ने बांग्लादेश की अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा बढ़ाने और देश के पासपोर्ट की वैश्विक स्वीकार्यता मजबूत करने का भी वादा किया है। इसका उद्देश्य बांग्लादेशी नागरिकों के लिए अंतरराष्ट्रीय यात्रा को आसान बनाना और देश की छवि को सुदृढ़ करना है।
मुस्लिम दुनिया और अन्य क्षेत्रीय संबंध
घोषणापत्र में मुस्लिम देशों के साथ मजबूत सहयोग और पूर्वी यूरोप, अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका के देशों के साथ कूटनीतिक, आर्थिक और रणनीतिक संबंध बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है।
संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय संगठनों में सक्रियता
जमात-ए-इस्लामी ने शांति, सुरक्षा, मानवाधिकार और आर्थिक विकास जैसी वैश्विक चुनौतियों से निपटने में संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय संगठनों में बांग्लादेश की सक्रिय भूमिका जारी रखने का संकल्प दोहराया।
रोहिंग्या संकट और शांति मिशन
पार्टी ने रोहिंग्या शरणार्थियों की सुरक्षित और सम्मानजनक वापसी सुनिश्चित करने और संयुक्त राष्ट्र शांति मिशनों में भागीदारी जारी रखने का भी वादा किया है।इस चुनाव में सत्तारूढ़ आवामी लीग को भाग लेने से रोका गया है। ऐसे में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी और जमात-ए-इस्लामी प्रमुख प्रतियोगी हैं। जुलाई 2024 में हुए ‘जुलाई जनआंदोलन’ के बाद से देश के राजनीतिक परिदृश्य में बड़े बदलाव आए हैं। इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप ने भी चुनाव की विश्वसनीयता और संभावित तनाव को लेकर चिंता जताई है। कुल मिलाकर 12 फरवरी का चुनाव बांग्लादेश के भविष्य और विदेश नीति की दिशा तय करेगा, और जमात-ए-इस्लामी का घोषणापत्र इस महत्वपूर्ण समय में जारी हुआ है।
