हाल ही में हुए 13वें आम चुनाव में बीएनपी ने 297 में से 209 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया, जबकि जमात-ए-इस्लामी को 68 सीटें मिलीं। यह चुनाव ऐसे समय में हुआ जब छात्र आंदोलनों और राजनीतिक अस्थिरता के बाद पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की लंबे समय से चली आ रही सरकार सत्ता से बाहर हो गई थी। अंतरिम सरकार के प्रमुख मुहम्मद यूनुस के कार्यकाल के दौरान आंतरिक और कूटनीतिक चुनौतियां चर्चा में रहीं, खासकर भारत के साथ संबंधों को लेकर। ऐसे में नई सरकार की विदेश नीति और आर्थिक रणनीति पर सबकी निगाहें टिकी हैं।
शपथ समारोह में क्षेत्रीय कूटनीति की झलक भी दिखाई देगी। भारत की ओर से लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला प्रतिनिधित्व करेंगे, जो दोनों देशों के रिश्तों में निरंतरता का संकेत है। राजनीतिक जीत के बाद तारिक रहमान ने विपक्षी नेताओं से मुलाकात कर संवाद और सहमति की राजनीति का संदेश दिया है। 1991 के बाद पहली बार कोई पुरुष नेता बांग्लादेश की कमान संभालने जा रहा है, जिससे देश की राजनीति नए दौर में प्रवेश करती नजर आ रही है। अब चुनौती होगी—आर्थिक स्थिरता, सामाजिक सद्भाव और क्षेत्रीय संतुलन को मजबूत दिशा देना।
