नई दिल्ली। पाकिस्तान में हाल के दिनों में कुछ मोबाइल ऐप्लिकेशन देश की सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बनकर सामने आए हैं। साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे कई ऐप हैं जो आम लोगों के व्यक्तिगत डाटा को चुपचाप इकट्ठा कर रहे हैं, जिन्हें विदेशी सर्वरों तक भेजा जा रहा है। विशेषज्ञों ने चेताया है कि इन ऐप की वजह से न केवल डाटा चोरी और ऑनलाइन ठगी बढ़ रही है, बल्कि आतंकवादी गतिविधियों को भी लगातार मदद मिल रही है। इसी कारण अब पाकिस्तान के भीतर इन ऐप पर व्यापक प्रतिबंध लगाने की मांग ज़ोर पकड़ रही है।
बढ़ता खतरा और विशेषज्ञों की चेतावनी
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इन ऐप के ज़रिये देश विरोधी तत्व सोशल मीडिया पर गुमनाम रहकर अपनी गतिविधियां चलाते हैं। असुरक्षित ऐप फोन में घुसकर व्यक्तिगत जानकारी, बैंक संबंधी विवरण, संपर्क सूची, फोटो और अन्य महत्वपूर्ण डाटा चुरा सकते हैं। इसी डाटा का उपयोग हैकर्स और ठग लोगों को निशाना बनाने में करते हैं।
विशेषज्ञ बताते हैं कि ऐसे कई ऐप फोन में वायरस, रैनसमवेयर और अन्य हानिकारक सॉफ्टवेयर भी डाल देते हैं, जिनसे पूरा सिस्टम लॉक हो सकता है। कई बार विदेशी संस्थाएं भी इन ऐप के माध्यम से लोगों की आदतें, लोकेशन और निजी गतिविधियों की जानकारी हासिल कर लेती हैं, जिससे देश की सुरक्षा पर बड़ा खतरा पैदा हो सकता है।
पाकिस्तान में क्यों बढ़ी प्रतिबंध की मांग?
सरकारी अधिकारियों और सुरक्षा एजेंसियों ने बताया कि इन ऐप का उपयोग आतंकवादी और देश विरोधी संगठन बड़े पैमाने पर कर रहे हैं। वे इन ऐप की मदद से अपनी असली पहचान छिपाकर सोशल मीडिया और मैसेजिंग मंचों पर बातचीत करते हैं, जिससे उनकी गतिविधियों का पता लगाना मुश्किल हो जाता है।
इसी कारण सुरक्षा एजेंसियों ने सरकार और पाकिस्तान दूरसंचार प्राधिकरण से मांग की है कि वे जल्द से जल्द सभी असुरक्षित और बिना अनुमति वाले ऐप पर प्रतिबंध लगाएं। उनका कहना है कि केवल वे ऐप जिनकी पूरी जांच हो चुकी है और जो देश के नियमों के अनुसार काम करते हैं, उन्हें उपयोग करने की अनुमति मिलनी चाहिए।
कई देशों में पहले से पाबंदी लागू
सुरक्षा कारणों से भारत, दुबई, सऊदी अरब और बांग्लादेश जैसे कई देशों ने पहले से ही ऐसे ऐप पर प्रतिबंध लगा रखा है। विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान में भी इसी प्रकार की सख्ती की आवश्यकता है, ताकि ऑनलाइन अपराध और आतंकवाद को बढ़ावा देने वाली तकनीकों को रोका जा सके।
कानूनी अनुमति वाली कंपनियों को लाइसेंस जारी
पाकिस्तान दूरसंचार प्राधिकरण ने 13 नवंबर से सुरक्षित सेवा प्रदान करने वाली कंपनियों को लाइसेंस जारी करना शुरू कर दिया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देश में केवल वही सेवाएं चलें जो पूरी तरह सुरक्षित और अधिकृत हों।
अब तक कई कंपनियों को लाइसेंस प्रदान किए जा चुके हैं, जिनमें स्टियर ल्यूसीड, क्रेस्ट, केस्ट्रेल, क्विक्स्योर और क्रिप्टोनाइम नाम की सेवाएँ शामिल हैं। इन कंपनियों को देश में सुरक्षित नेटवर्क सेवा प्रदान करने की अनुमति दी गई है। सरकारी अधिकारियों का कहना है कि इससे आम लोगों, दफ्तरों और कंपनियों को सुरक्षित विकल्प उपलब्ध होंगे।
पाक मंत्री ने आतंकवादियों द्वारा दुरुपयोग की पुष्टि की
पाकिस्तान के राज्य मंत्री तलाल चौधरी ने पुष्टि की है कि आतंकवादी इन ऐप की मदद से अपने ठिकाने और पहचान छिपाते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य तकनीकी क्षेत्र को नुकसान पहुंचाना नहीं है, बल्कि उसे सुरक्षित बनाना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पंजीकृत और अधिकृत सेवाओं का उपयोग करने वाली कंपनियों या आम लोगों को कोई परेशानी नहीं होगी।
मंत्री ने कहा कि यदि सभी नेटवर्क सेवाएं पंजीकृत होंगी, तो आतंकवादी गतिविधियों पर बेहतर निगरानी रखी जा सकेगी और देश की सुरक्षा मजबूत होगी।
