ट्रंप ने कहा कि उन्हें ईरान से कई संदेश मिले हैं, जिनसे पता चला कि वहां की जनता अपनी सरकार के खिलाफ और अधिक हमलों की मांग कर रही है। जब उनसे पूछा गया कि इन हमलों का आम ईरानी नागरिकों पर क्या असर पड़ेगा, तो उन्होंने दावा किया कि ईरानी लोग अपनी आजादी पाने के लिए तकलीफ उठाने को तैयार हैं।
ट्रंप की चेतावनी
उन्होंने ईरान के बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने की योजना का बचाव करते हुए कहा कि हर फैसला सोच-समझकर लिया गया है। ट्रंप ने साफ किया कि यदि समझौता नहीं हुआ, तो ईरान के कोई पुल या पावर प्लांट सुरक्षित नहीं रहेंगे और देश पूरी तरह तबाह हो जाएगा। उन्होंने अपने सख्त समय-सीमा की बात भी दोहराई, जिसमें कहा कि मंगलवार रात 8 बजे (भारतीय समयानुसार बुधवार सुबह 1 बजे) तक कोई रियायत नहीं दी जाएगी।
ट्रंप ने रखी शर्त
ट्रंप ने शर्त रखी कि वे केवल ऐसे समझौते को मंजूर करेंगे जिसमें तेल की बिना रोक-टोक आवाजाही सुनिश्चित हो। होर्मुज जलडमरूमध्य के विवाद पर उन्होंने नया बयान देते हुए कहा कि ईरान जहाजों से टोल नहीं वसूल सकता। ट्रंप ने स्पष्ट किया, “जीत हमारी है, वे सैन्य रूप से हार चुके हैं।” उन्होंने दोहराया कि अमेरिका ने इस संघर्ष को जीत लिया है और अब शर्तें उनके अनुसार तय होंगी।
पूर्व ईरानी विदेश मंत्री की प्रतिक्रिया
पूर्व ईरानी विदेश मंत्री ने इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए ट्रंप को मूर्ख राष्ट्रपति बताया और चेताया कि अरब देशों के शासकों को अमेरिकी हस्तक्षेप से बचाव करना चाहिए, ताकि पूरे क्षेत्र को अंधेरे में डूबने से रोका जा सके।
गौरतलब है कि होर्मुज का मार्ग दुनिया के 20 प्रतिशत कच्चे तेल के आयात-निर्यात के लिए महत्वपूर्ण है, और इस तनाव ने वैश्विक ऊर्जा संकट की संभावना बढ़ा दी है।
