जर्मनी में भी भारतीय उत्पादों की मांग स्थिर और मजबूत बनी हुई है। इसी अवधि में जर्मनी को निर्यात 9.3 प्रतिशत बढ़कर 7.5 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंच गया। भारत के कुल निर्यात में जर्मनी की हिस्सेदारी अब करीब 2.6 प्रतिशत हो चुकी है। वहीं बेल्जियम में निर्यात 4.4 अरब डॉलर के पार हो गया है और पोलैंड में भी 7.6 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। यह संकेत देता है कि भारत सिर्फ परंपरागत यूरोपीय बाजारों तक सीमित नहीं रहा बल्कि नए देशों में भी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहा है।विशेषज्ञों के अनुसार स्पेन में तेज़ बढ़ोतरी जर्मनी में स्थिर मांग और बेल्जियम-पोलैंड में निरंतर विस्तार यह दर्शाता है कि भारत की यूरोप रणनीति संतुलित और विविध हो रही है। भारत और यूरोपीय संघ के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते FTA से आने वाले समय में व्यापार को और रफ्तार मिलने की संभावना है।
वित्त वर्ष 2024-25 में भारत और यूरोपीय संघ के बीच द्विपक्षीय व्यापार करीब 136 अरब डॉलर तक पहुंच गया जिसमें भारत का निर्यात लगभग 76 अरब डॉलर रहा। यूरोपीय संघ अब भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बन चुका है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर भारत-EU FTA लागू होता है तो कपड़ा दवाइयां स्टील पेट्रोलियम उत्पाद और इलेक्ट्रिकल उपकरण जैसे भारतीय उत्पाद यूरोपीय बाजार में और अधिक प्रतिस्पर्धी बनेंगे।इस तरह यूरोप में भारतीय निर्यात की लगातार बढ़ती पकड़ न केवल भारत की आर्थिक वृद्धि को बल दे रही है बल्कि वैश्विक व्यापार में उसकी रणनीतिक स्थिति को भी मजबूत कर रही है। विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले वर्षों में यूरोपीय बाजार भारत के लिए अमेरिकी बाजार के मुकाबले अधिक स्थिर और भरोसेमंद बन सकता है।
