रिपोर्ट्स के मुताबिक मिडिल ईस्ट में बढ़ते संघर्ष के कारण सप्लाई चेन प्रभावित होने की आशंका है। इसी खतरे को देखते हुए सरकार ने देर रात निर्देश जारी किए। आदेश के अनुसार अब रिफाइनरी कंपनियां इन गैसों का उपयोग अन्य औद्योगिक कामों में नहीं करेंगी, बल्कि इन्हें सीधे LPG उत्पादन में लगाया जाएगा।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि प्रोपेन और ब्यूटेन की सप्लाई प्राथमिकता के आधार पर सरकारी तेल कंपनियों को दी जाएगी। इसमें प्रमुख रूप से Indian Oil Corporation, Hindustan Petroleum और Bharat Petroleum शामिल हैं। इस फैसले का उद्देश्य देश के करीब 33 करोड़ से अधिक LPG उपभोक्ताओं को बिना रुकावट गैस सिलेंडर उपलब्ध कराना है।
LPG दरअसल प्रोपेन और ब्यूटेन गैसों का मिश्रण होती है, जो कच्चे तेल की रिफाइनिंग के दौरान निकलती हैं। इन गैसों का इस्तेमाल आम तौर पर पेट्रोकेमिकल उद्योग, प्लास्टिक निर्माण और ईंधन के रूप में भी किया जाता है। लेकिन मौजूदा हालात में सरकार ने इनका उपयोग मुख्य रूप से घरेलू गैस उत्पादन में करने का निर्देश दिया है।
सरकार के इस फैसले का असर निजी कंपनियों पर भी पड़ सकता है। खासकर Reliance Industries जैसी कंपनियों के पेट्रोकेमिकल उत्पादन और निर्यात पर इसका असर पड़ने की संभावना है। प्रोपेन और ब्यूटेन के डायवर्जन के कारण अल्काइलेट्स जैसे उत्पादों का उत्पादन कम हो सकता है, जिनका उपयोग पेट्रोल की गुणवत्ता सुधारने में किया जाता है। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि इससे कंपनियों के मुनाफे पर भी दबाव पड़ सकता है, क्योंकि पेट्रोकेमिकल उत्पाद बाजार में LPG से ज्यादा कीमत पर बिकते हैं।
स्थिति को और गंभीर बनाने वाली खबर कतर से आई है। रिपोर्ट्स के अनुसार ईरानी ड्रोन हमलों के बाद कतर ने अपने कुछ LNG प्लांट का उत्पादन अस्थायी रूप से रोक दिया है। इससे भारत को मिलने वाली गैस सप्लाई में लगभग 40 प्रतिशत तक कटौती हो गई है। भारत अपनी कुल LNG जरूरत का बड़ा हिस्सा कतर से आयात करता है, इसलिए यह रुकावट घरेलू बाजार पर सीधा असर डाल सकती है।
सबसे बड़ी चिंता Strait of Hormuz को लेकर है, जो कतर और यूएई जैसे देशों से तेल-गैस सप्लाई का मुख्य समुद्री मार्ग है। युद्ध के कारण इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों की संख्या तेजी से घट गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक जहां 28 फरवरी को इस मार्ग से 91 जहाज गुजरे थे, वहीं अब यह संख्या घटकर लगभग 26 रह गई है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से आयात करता है।
उधर गैस की कमी को लेकर सिटी गैस कंपनियों ने भी सरकार को चेतावनी दी है कि अगर हालात जल्द नहीं सुधरे, तो CNG और PNG की कीमतें बढ़ सकती हैं। उद्योग संगठनों का कहना है कि अगर कतर से सस्ती गैस नहीं मिली तो उन्हें स्पॉट मार्केट से महंगी गैस खरीदनी पड़ेगी, जिसकी कीमत फिलहाल दोगुनी से भी ज्यादा है।
इस पूरे संकट को देखते हुए भारत सरकार फिलहाल घरेलू गैस आपूर्ति को सुरक्षित रखने के लिए हर संभव कदम उठा रही है, ताकि आम लोगों को रसोई गैस की किल्लत का सामना न करना पड़े।
