लाहौर। हमदर्द यूनिवर्सिटी इन दिनों सोशल मीडिया पर जबरदस्त चर्चा और ट्रोलिंग का विषय बनी हुई है। वजह बना रमजान के दौरान जारी बताया जा रहा एक कथित नोटिस, जिसमें कैंपस में लड़के और लड़की के साथ खड़े होने पर आपत्ति जताने और यहां तक कि उनका “निकाह” कराए जाने जैसी बात लिखी होने का दावा किया जा रहा है।
वायरल नोटिस में क्या कहा गया?
सोशल मीडिया पर फैल रहे स्क्रीनशॉट के अनुसार, छात्रों को संबोधित करते हुए कहा गया है कि पवित्र महीने के दौरान किसी भी “कपल” का कैंपस में साथ खड़ा होना सख्त मना है।
कथित तौर पर इसमें चेतावनी दी गई कि यदि कोई लड़का-लड़की साथ पाया गया तो उनका “तुरंत निकाह” करवा दिया जाएगा।
इसके साथ ही छात्रों को संस्थान की “पवित्रता बनाए रखने” और अनावश्यक नजदीकी से बचने की सलाह देने की बात भी कही गई है।
वायरल सामग्री में मजाकिया अंदाज में यह दावा भी किया जा रहा है कि नियम तोड़ने वालों को वलीमा (रिसेप्शन) का खर्च खुद उठाना होगा।
असली या फर्जी? प्रामाणिकता पर सवाल
इस कथित नोटिस की सत्यता को लेकर अब भी स्थिति स्पष्ट नहीं है।
कई लोग इसे फर्जी बता रहे हैं और कह रहे हैं कि ऐसा कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं हुआ। विश्वविद्यालय की ओर से भी अब तक कोई औपचारिक पुष्टि सामने नहीं आई है, जिससे मामला और चर्चा में आ गया है।
सोशल मीडिया पर यूजर्स ने लिए मजे
नोटिस वायरल होते ही इंटरनेट पर मीम्स और मजेदार प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई—
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“रिश्ता कराने का तरीका थोड़ा कैज़ुअल है।”
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“जिनके घर वाले नहीं मान रहे, उनके लिए सुनहरा मौका!”
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“अब तो क्रश के पास जाकर खड़े होना पड़ेगा।”
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“ऐसी यूनिवर्सिटी में एडमिशन कैसे लें?”
छात्रों और कंटेंट क्रिएटर्स ने रील्स बनाकर इस कथित आदेश का हास्यपूर्ण अंदाज में मजाक उड़ाया, जिससे मामला तेजी से फैल गया।
बहस का मुद्दा क्या बना?
चाहे नोटिस असली हो या फर्जी, लेकिन इस घटना ने कैंपस अनुशासन, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और सोशल मीडिया पर अपुष्ट सूचनाओं के तेज प्रसार को लेकर नई बहस छेड़ दी है—कि बिना पुष्टि के वायरल सामग्री किस तरह सार्वजनिक धारणा को प्रभावित कर सकती है।
