नई दिल्ली। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 4 दिसंबर से दो दिन के भारत दौरे पर आ रहे हैं। फरवरी 2022 में यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद यह उनकी पहली भारत यात्रा होगी। पुतिन इस दौरान 23वीं भारत–रूस वार्षिक शिखर बैठक Annual Summit में शामिल होंगे जिसकी मेजबानी इस बार भारत कर रहा है। परंपरा के अनुसार यह वार्षिक समिट दोनों देशों में बारी-बारी आयोजित की जाती है। पुतिन की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ विस्तृत वार्ता होगी, जिसमें रक्षा सहयोग, ऊर्जा व्यापार, S-400 मिसाइल सिस्टम की डील, पेमेंट मैकेनिज़्म और फ्री ट्रेड एग्रीमेंट FTA जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, पुतिन के सम्मान में स्टेट डिनर भी देंगी।
अमेरिका की सख्ती: रूसी तेल खरीद पर भारत को 50% टैरिफ का सामना
भारत रूस से बड़ी मात्रा में डिस्काउंटेड क्रूड ऑयल खरीद रहा है। इसका विरोध करते हुए अमेरिका भारत के कई निर्यात उत्पादों पर 25% अतिरिक्त शुल्क लगा चुका है। इसके चलते भारत को अब कुल 50% तक टैरिफ झेलना पड़ रहा है। वॉशिंगटन का कहना है कि रूस की तेल आय ने उसे यूक्रेन युद्ध जारी रखने में मदद की है। पुतिन-मोदी बैठक में इस मुद्दे पर भी चर्चा संभावित है।
डिफेंस डील्स इस यात्रा का सबसे बड़ा केंद्र
इस शिखर सम्मेलन का मुख्य फोकस रक्षा सहयोग पर रहेगा। रूस साफ संकेत दे चुका है कि वह भारत को अपना अत्याधुनिक SU-57 स्टेल्थ फाइटर जेट देने के लिए तैयार है। भारत वायुसेना आधुनिक लड़ाकू विमानों के नए विकल्प ढूंढ रहा है, ऐसे में यह प्रस्ताव अहम माना जा रहा है। इसके अलावा दोनों देशों में इन मुद्दों पर भी चर्चा संभावित है- S-500 मिसाइल सिस्टम पर भविष्य का सहयोग ब्रह्मोस मिसाइल के अगले वर्ज़न का संयुक्त विकास नौसेनाओं के लिए जॉइंट वॉरशिप निर्माण नई S-400 डील पर भी बातचीत PTI के अनुसार, भारत रूस से कुछ और S-400 एयर डिफेंस सिस्टम खरीदने पर विचार कर सकता है। पाकिस्तान के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इनकी क्षमता बेहद प्रभावी साबित हुई थी। भारत पहले ही पाँच S-400 सिस्टम खरीदने की डील कर चुका है, जिनमें से तीन मिल चुके हैं, जबकि चौथे की डिलीवरी यूक्रेन युद्ध की वजह से रुकी पड़ी है। S-400 ट्रायम्फ दुनिया के सबसे उन्नत एयर-डिफेंस सिस्टम में से एक माना जाता है जो फाइटर जेट बैलिस्टिक मिसाइल क्रूज मिसाइल, ड्रोन और स्टेल्थ एयरक्राफ्ट तक को मार गिराने की क्षमता रखता है।
पेमेंट सिस्टम: सबसे अहम आर्थिक एजेंडा
रूस-भारत ऊर्जा व्यापार को अमेरिकी और यूरोपीय प्रतिबंध लगातार प्रभावित करते रहे हैं। पुतिन की इस यात्रा में दोनों देशों का उद्देश्य एक नया, निर्बाध पेमेंट सिस्टम विकसित करना होगा। इसमें संभावित विकल्प हैं- रुपया-रूबल भुगतान व्यवस्था डिजिटल पेमेंट मॉडल या किसी तीसरे देश के बैंक के जरिए लेन-देन इसके अलावा रूस भारत को आर्कटिक क्षेत्र की ऊर्जा परियोजनाओं में निवेश के अवसर भी दे सकता है जहां रूस बड़े पैमाने पर गैस और पेट्रोलियम भंडार विकसित कर रहा है।
रूस में भारतीय वर्कर्स के लिए नए अवसर
रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद रूस में कई क्षेत्रों में वर्कफोर्स की कमी हो गई है। मॉस्को चाहता है कि भारत से तकनीकी विशेषज्ञ, इंजीनियर, डॉक्टर और अन्य स्किल्ड वर्कर्स रूस में काम करें। इसलिए दोनों देशों के बीच स्किल डेवलपमेंट और वर्क वीज़ा सहयोग पर समझौता होने की संभावना है।स्पेस, न्यूक्लियर पावर, साइंस-टेक और पोर्ट विकास भी इस समिट के प्रमुख विषयों में शामिल हैं। भारत तमिलनाडु के कुडनकुलम न्यूक्लियर प्लांट को रूस की साझेदारी में चला रहा है, जिसका विस्तार भी एजेंडा में रहेगा। NSA अजीत डोभाल की मॉस्को यात्रा ने तय की थी यात्रा की नींव अगस्त में भारत के NSA अजीत डोभाल ने मॉस्को जाकर पुतिन से मुलाकात की थी। दोनों देशों के सुरक्षा और आर्थिक सहयोग पर लंबी चर्चा हुई थी। पुतिन ने तभी कहा था कि वे जल्द ही भारत आएंगे और तारीखें लगभग तय हो चुकी हैं।
2021 के बाद पहली भारत यात्रा
पुतिन इससे पहले आखिरी बार दिसंबर 2021 में भारत आए थे। वह यात्रा केवल 4 घंटे की थी, जिसमें 28 समझौते हुए थे। दोनों देशों ने 2025 तक 30 अरब डॉलर वार्षिक व्यापार का लक्ष्य रखा था जिसे अब 2030 तक बढ़ाकर 100 अरब डॉलर सालाना करने पर सहमति बनी है। फिलहाल व्यापार लगभग 60 अरब डॉलर के आसपास है।
ICC वारंट के बाद सीमित हुई अंतरराष्ट्रीय यात्राएं
मार्च 2023 में इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट ICC ने यूक्रेन में बच्चों के अपहरण और डिपोर्टेशन के आरोपों के आधार पर पुतिन के खिलाफ अरेस्ट वारंट जारी किया था। यह पहला मौका था जब UNSC के किसी स्थायी सदस्य देश के शीर्ष नेता पर ऐसा कदम उठाया गया।इसके बाद पुतिन अंतरराष्ट्रीय यात्राओं से बचते रहे। 2023 के G20 भारत सम्मेलन में नहीं आए 2024 के G20 ब्राजील सम्मेलन में भी हिस्सा नहीं लिया दोनों अवसरों पर रूस का प्रतिनिधित्व विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने किया।
