नई दिल्ली । रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 4 दिसंबर को भारत दौरे पर आ रहे हैं और यह उनकी 2022 में शुरू हुए यूक्रेन युद्ध के बाद पहली भारत यात्रा होगी। इस दौरे पर पुतिन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हो सकती है जिनमें क्रूड ऑयल डील मिसाइल डिफेंस सिस्टम और एक संभावित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट शामिल हैं। इसके अलावा दोनों देशों के बीच अफगानिस्तान में बढ़ते अमेरिकी प्रभाव और पाकिस्तान की भूमिका पर भी बातचीत होने की संभावना है।
लेकिन इससे पहले पुतिन के भारत आने से पहले पाकिस्तान ने एक ऐसा कदम उठाया है, जिसे रूस ने अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक हितों के खिलाफ माना। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई पर रूस ने एक बड़ी कार्रवाई की है। रूस ने पाकिस्तान के खिलाफ एक जांच शुरू कर दी है जिसमें यह आरोप लगाया जा रहा है कि पाकिस्तान ने ताजिकिस्तान में काम कर रहे तीन चीनी नागरिकों की हत्या करने के लिए एक एयरस्ट्राइक की योजना बनाई थी। इस घटना ने न सिर्फ रूस और पाकिस्तान के रिश्तों में तनाव पैदा किया है बल्कि चीन भी इस मामले को लेकर चिंतित हो सकता है।
यह घटना 28 नवंबर को ताजिकिस्तान में हुई एक रहस्यमई एयरस्ट्राइक से जुड़ी है, जिसमें तीन चीनी नागरिक मारे गए। पाकिस्तान ने इस हमले का आरोप अफगानिस्तान पर लगाया लेकिन अफगानिस्तान ने इस आरोप को नकारते हुए कहा कि उसका इस हमले से कोई लेना-देना नहीं है। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी रूस और चीन दोनों ने इस मामले में अपनी-अपनी जांच शुरू की। रूस को संदेह है कि इस हमले के पीछे पाकिस्तान का हाथ हो सकता है और यह संभावना जताई जा रही है कि यह हमले की योजना अमेरिका ने पाकिस्तान से करवाई हो।
अमेरिका के अफगानिस्तान में बढ़ते प्रभाव को लेकर रूस और चीन के बीच चिंता गहरी हो गई है। अफगानिस्तान में अमेरिकी उपस्थिति के बढ़ने के बाद रूस और चीन दोनों ही इस क्षेत्र में अमेरिकी हस्तक्षेप को खारिज करने की कोशिश कर रहे हैं। रूस के लिए यह अत्यंत महत्वपूर्ण है कि अफगानिस्तान में उसकी स्थिति मजबूत रहे खासकर जब पाकिस्तान और अन्य केंद्रीय एशियाई देशों के साथ संबंधों में अस्थिरता आ सकती है।
यह भी माना जा रहा है कि अमेरिका अफगानिस्तान में बगराम एयरबेस पर दोबारा कब्जा करने की कोशिश कर रहा है, ताकि वह अपनी सैन्य मौजूदगी को फिर से स्थापित कर सके। रूस और चीन को यह बात खासतौर से परेशान कर रही है, क्योंकि वे इस क्षेत्र में अपनी रणनीतिक स्थिति को बनाए रखना चाहते हैं और अमेरिका को अपनी गतिविधियों को बढ़ाने का मौका नहीं देना चाहते। इस पूरी स्थिति में पाकिस्तान का रवैया रूस और चीन के लिए संकट का कारण बन सकता है।
इस घटनाक्रम का सबसे बड़ा असर चीन और पाकिस्तान के रिश्तों पर हो सकता है, क्योंकि चीन अपने नागरिकों की सुरक्षा को लेकर बेहद गंभीर है। यदि यह साबित हो जाता है कि पाकिस्तान ने चीनी नागरिकों की हत्या की है, तो यह चीन और पाकिस्तान के बीच के रिश्तों में तनाव उत्पन्न कर सकता है। इसके अलावा रूस और पाकिस्तान के रिश्ते भी प्रभावित हो सकते हैं खासकर अगर जांच में पाकिस्तान के खिलाफ ठोस सबूत मिले।
इस स्थिति में भारत के लिए भी एक अवसर हो सकता है। भारत, जो पहले ही रूस के साथ मजबूत रणनीतिक रिश्ते बनाए हुए है इस स्थिति का फायदा उठाकर रूस और चीन के साथ अपने रिश्तों को और मजबूत कर सकता है। पुतिन के भारत दौरे के दौरान यह संभावना है कि भारत और रूस कई महत्वपूर्ण समझौतों पर चर्चा करें जिनमें रक्षा ऊर्जा और व्यापारिक सहयोग शामिल हो सकते हैं।
इसके अलावा अफगानिस्तान में अमेरिका का बढ़ता प्रभाव भारत के लिए एक चिंता का विषय हो सकता है क्योंकि भारत ने इस क्षेत्र में अपनी भूमिका को और मजबूत करने की कोशिश की है। पुतिन के भारत दौरे के दौरान यह संभावना है कि भारत और रूस अफगानिस्तान पाकिस्तान और अन्य केंद्रीय एशियाई देशों में बढ़ते अमेरिकी प्रभाव का मुकाबला करने के लिए अपनी रणनीतियों पर चर्चा करें।
इस पूरी घटनाक्रम से यह साफ हो जाता है कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में तेजी से बदलाव हो रहे हैं और विभिन्न देशों के रिश्तों पर इसका असर पड़ सकता है। रूस का पाकिस्तान के खिलाफ उठाया गया कदम चीन की चिंता और भारत का अपना रणनीतिक दृष्टिकोण इन सभी पहलुओं को समझते हुए यह कहा जा सकता है कि आने वाले दिनों में वैश्विक राजनीति में नई चुनौतियाँ और अवसर पैदा हो सकते हैं।
