रिपोर्ट में बताया गया कि हिंसा बांग्लादेश के 30 से अधिक जिलों में हुई। इनमें रंगपुर, चांदपुर, चटगांव, दिनाजपुर, लालमोनिरहाट, सुनामगंज, खुलना, कुमिल्ला, गाजीपुर, टांगाइल और सिलहट जैसे जिले शामिल हैं। मानवाधिकार संगठन का कहना है कि इतने व्यापक इलाके में बार-बार इस तरह की घटनाओं का होना अल्पसंख्यक समुदाय की प्रणालीगत असुरक्षा को दर्शाता है।रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि अक्सर सोशल मीडिया या निजी बातचीत में किसी व्यक्ति पर ईशनिंदा का आरोप लगाया जाता है। इसके बाद पुलिस कार्रवाई होती है, भीड़ इकट्ठा हो जाती है और हिंसा फैलती है। अक्सर हिंसा सिर्फ आरोपी तक सीमित नहीं रहती, बल्कि हिंदू मोहल्लों के घर, मंदिर और दुकानों को भी निशाना बनाया जाता है।
विशेष चिंता की बात यह है कि हिंसा में नाबालिग भी शामिल हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि 90 फीसदी से ज्यादा आरोपी हिंदू थे, जिनमें 15 से 17 साल के नाबालिग भी शामिल थे। उदाहरण के लिए, 27 जुलाई 2025 को रंगपुर के बेटगारी यूनियन में एक 17 वर्षीय लड़के की गिरफ्तारी के बाद भीड़ ने कम से कम 22 हिंदू घरों में तोड़फोड़ की।एचआरसीबीएम के मुताबिक, कई मामलों में सोशल मीडिया खासतौर से फेसबुक का इस्तेमाल आरोपों के लिए हुआ। कई बार अकाउंट हैक पाए गए और पोस्ट की सच्चाई साबित नहीं हो सकी। इसके बावजूद पुलिस ने भीड़ के दबाव में आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। जांच पूरी होने से पहले ही FIR दर्ज कर दी जाती थी।
शिक्षण संस्थानों में भी इसका असर पड़ा। कई कॉलेज और यूनिवर्सिटी छात्रों को निलंबित किया गया, उन्हें कॉलेज से निकाल दिया गया और कुछ को पुलिस रिमांड में भेजा गया। रिपोर्ट में साइबर सिक्योरिटी एक्ट के तहत दर्ज मामलों की संख्या भी उल्लेखनीय बताई गई है।रिपोर्ट में कई मौतों का भी जिक्र है। 18 दिसंबर 2025 को मयमनसिंह में 30 वर्षीय हिंदू युवक को भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला और शव को जला दिया। खुलना में एक नाबालिग पर कथित तौर पर सुरक्षाकर्मियों की मौजूदगी में हमला किया गया। इन घटनाओं ने कानून व्यवस्था और पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
भारत ने भी बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ बढ़ती हिंसा पर गंभीर चिंता जताई है। विदेश मंत्रालय MEA ने हालात को लगातार जारी दुश्मनी करार दिया और दोषियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की मांग की।एचआरसीबीएम की रिपोर्ट साफ करती है कि बांग्लादेश में धार्मिक अल्पसंख्यक विशेषकर हिंदू समुदाय लगातार असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। राजनीतिक अस्थिरता के इस दौर में रिपोर्ट ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय और बांग्लादेश सरकार दोनों से अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है।
